shahnawaaz khan

shahnawaaz khan

@sak4458

shahnawaaz khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in shahnawaaz khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
सारी हिकायत तो मियांँ आईने जैसी साफ़ थी
तुम ने ही अपने ज़ेहन में रिश्तों को पेचीदा किया
shahnawaaz khan
लफ़्ज़ों में क्या बयान हो कर्बल की तिश्नगी
प्यासी रही फ़ुरात पे रोना पड़ा मुझे
shahnawaaz khan
ज़िंदगी तुझ सेे इस लड़ाई में
मौत इक रोज़ जीत जाएगी
shahnawaaz khan
ये मैं ही हूँ जो आज तक कुछ भी न अच्छा कर सका
तू ने तो मेरी जान जो कुछ भी किया अच्छा किया
shahnawaaz khan
लड़ते-झगड़ते रंज से इक रोज़ यूँंँ हुआ
तन्हाई से, ख़लिश से मुझे प्यार हो गया
shahnawaaz khan
दुआ करना हमारे हक़ में जब मर जाएँ ऐ लोगों
कि अब तो ख़्वाब में क़ब्रों की तन्हाई रुलाती है
shahnawaaz khan
खेल का हिस्सा थे जब तक खेल बस इक खेल था
राज़ सारे खुल गए जब मैं तमाशाई हुआ
shahnawaaz khan
हो सद-आफ़रीं तुझ को यादों के साए
तुझे तो बिछड़ने की उजलत नहीं है
shahnawaaz khan
गले से लग कर तुम्हीं ज़माने पे राज़ खोलो
तुम्हारा होने की किस को किस को सफ़ाई देंगे
shahnawaaz khan
उस ने तो साफ़-गोई से हर बात की
बस हमीं बात में बात टाले गए
shahnawaaz khan
है ज़ेहन यूँँ मुहीत मेरा याद-ए-यार से
ख़ुशबू रखी हो जैसे किसी इत्र-दान में
shahnawaaz khan
तू ख़ुद भी अपने आप से अब तक न मिल सका
दिल अपना तुझ को ऐ दिल-ए-नादान कौन दे
shahnawaaz khan
मिट्टी तुम्हारे हिज्र की ज़रख़ेज़ हो गई
अब शे'र उगने लग गए दिल की ज़मीन पर
shahnawaaz khan
क्या ख़बर कब ठहरने लग जाए
साँस का ऐतिबार कौन करे
shahnawaaz khan