Zeeshan kaavish

Zeeshan kaavish

@za1996002

Zeeshan kaavish shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zeeshan kaavish's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
तेरी यादों को मिटा सकते हैं
हर तरफ़ फूल खिला सकते हैं

तुझ को गर भूलने पे आएँ हम
इक ही लम्हे में भुला सकते हैं
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Zeeshan kaavish
बैठे बैठे वो चल दिया होगा
याद उस ने मुझे किया होगा

सिगरेटों को नहीं पिया मैं ने
सिगरेटों ने मुझे पिया होगा
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Zeeshan kaavish
काम मुश्किल था मगर कर जाता
ज़ख़्म-ए-दिल मेरा कोई भर जाता

सिगरटों ने मुझे बचाया है
गर न पीता इन्हें तो मर जाता
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Zeeshan kaavish
बिन कहे छोड़ के न जाता तो
अपनी आँखों से कुछ जताता तो

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
पर वो मजबूरियाँ बताता तो
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Zeeshan kaavish
तुझ सेे बिछडूँगा तो पागल नहीं होने वाला
हाँ मगर सच है मुकम्मल नहीं होने वाला

कोई नुक़सान नहीं होगा उसे पाने में
वो खरा सोना है पीतल नहीं होने वाला
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Zeeshan kaavish
वो मुहब्बत का तलबगार नहीं हो सकता
जो सितमगर है उसे प्यार नहीं हो सकता

तेरे होते हुए जो चाँद का दीदार करे
कुछ भी होगा वो समझदार नहीं हो सकता
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Zeeshan kaavish
वो मुहब्बत का तलबगार नहीं हो सकता
जो सितमगर है उसे प्यार नहीं हो सकता

तेरे होते हुए जो चाँद का दीदार करे
कुछ भी होगा वो समझदार नहीं हो सकता
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Zeeshan kaavish
वो ही मुझ को गिराने वाला है
जिस को गिरते हुए सँभाला है

दिल को पत्थर बनाया था मैं ने
उस ने पत्थर भी तोड़ डाला है
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Zeeshan kaavish
जाम आँखों से पी लिया मैं ने
जितना जीना था जी लिया मैं ने
Zeeshan kaavish
तेरी यादों से गुज़रने के लिए
ज़िंदा रहता हूँ मैं मरने के लिए
Zeeshan kaavish
उन की आँखों से जब से पी यारो
छोड़ दी तब से मय-कशी यारो

रात को छत से चाँद जब देखा
याद उन की फिर आ गई यारो
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Zeeshan kaavish
दर से उठते हैं तो दीवार से लग जाते हैं
इक झलक उन की मगर देख नहीं पाते हैं
Zeeshan kaavish
तीरगी में मत बैठो रौशनी में आ जाओ
चाँद का ये अरमाँ है चाँदनी में आ जाओ

बेक़रार है ये दिल आप के लिए कब से
छोड़ कर झिझक मेरी ज़िंदगी में आ जाओ
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Zeeshan kaavish
तेरे जुमले तेरे क़िस्से भुला के आज आए हैं
तेरी यादों के सारे ख़त जला के आज आए हैं
Zeeshan kaavish
हम को इस जाम में नहाने दो
अपनी आँखों में डूब जाने दो

आप के रुख़ पे क्यूँँ उदासी है
अपने होंठों को मुस्कुराने दो
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Zeeshan kaavish
गुल भी हो सकता है और जाम भी हो सकता है
हुस्न का तेरे कोई नाम भी हो सकता है

अपने किरदार से ऐ नाम कमाने वाले
तेरी ख़ातिर कोई बदनाम भी हो सकता है
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Zeeshan kaavish
मुहब्बत का मुहब्बत से कोई जब नाम लेता है
किसी का हो गया है वो यही पैग़ाम देता है
Zeeshan kaavish
तुझे ख़बर भी है ऐ बे-वफ़ा हज़ारों ने
हयात काट दी रो रो के ग़म के मारों ने

मिलूँ मैं चाँद से अपने तो किस तरह से मिलूँ
फ़लक को घेर लिया है कई सितारों ने
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Zeeshan kaavish
कभी फूलों से कहता है कभी भॅवरों से कहता है
कभी ये दिल मेरा चुप चाप ही हर दर्द सहता है

यक़ीं मानो मैं अपना राज़ ए दिल तुम को बताता हूँ
जो मेरे दिल का दुश्मन है वो मेरे दिल में रहता है
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Zeeshan kaavish
ख़ुशी भी रखते हैं और ग़म भी साथ रखते हैं
हम अपने ज़ख़्म का मरहम भी साथ रखते हैं
Zeeshan kaavish

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