Amit Rajvanshi 'Guru'

Amit Rajvanshi 'Guru'

@AmitRajvanshiGuru

Amit Rajvanshi 'Guru' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Amit Rajvanshi 'Guru''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
तुम्हारी हसरतें पूरी हो जाएँ बस
मुझे तो वैसे भी सब भूल जाना है
Amit Rajvanshi 'Guru'
ये बहाने ये शिकायत ये तग़ाफ़ुल किस लिए
साफ़ ही कह दीजिए दो रास्तों की बात है
Amit Rajvanshi 'Guru'
ये जो आया है कोई और है
वो जो मेरा था आया ही नहीं
Amit Rajvanshi 'Guru'
जहाँ थी चहचहाहट कल वहाँ ख़ामोश मंज़र है
बिछड़ कर पंछियों से शाख़ अब वीरान दिखती है
Amit Rajvanshi 'Guru'
जाने वाला तो यहाँ से कब का जा चुका
रोकना तो है फ़क़त लकीर पीटना
Amit Rajvanshi 'Guru'
सब को जोड़े से हम ने बिठाया मगर
सब से आख़िर में हम ही खड़े रह गए
Amit Rajvanshi 'Guru'
बात ही बात में बात बढ़ती गई
सारे वादे धरे के धरे रह गए
Amit Rajvanshi 'Guru'
हक़ीक़त में कभी सावन नहीं देखा
हम ऐसे लोगों ने बचपन नहीं देखा

सभी ने देखा इक हैरत से ये चेहरा
रहेगा ग़म किसी ने मन नहीं देखा
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Amit Rajvanshi 'Guru'
क्या अजब सी बंदिश राह-ए-वस्ल में है
चश्मे आ रहे हैं दो निगाहों के बीच
Amit Rajvanshi 'Guru'
दवाएँ दे रहे हैं मेरे जैसे शख़्स को
कमाल है कि इन के पास डिग्रियाँ भी हैं
Amit Rajvanshi 'Guru'
हमारी ज़िंदगी का वो बना है जो
चराग़ों का शब-ए-आख़िर में बनता है
Amit Rajvanshi 'Guru'
ये मुझ से बिछड़ना तो पहला क़दम था
अभी तुम यहाँ और माहिर बनोगे
Amit Rajvanshi 'Guru'
तेरे काँधे पे हाथ मेरा मैं रख तो दूँ लेकिन
मेरे छूने भर से तेरा कुर्ता मैला लगेगा
Amit Rajvanshi 'Guru'
मेरे ज़ख़्मों को भी नासूर है दरकार
सुना है काँटे से काँटा निकलता है
Amit Rajvanshi 'Guru'
वो बात और है जो मैं ग़मज़दा नहीं
सब की तरह मेरा भी इक काश रह गया
Amit Rajvanshi 'Guru'
इसलिए भी हूँ मैं उसका आइना 'गुरू'
क्या बला है वो अभी ये जानती नहीं
Amit Rajvanshi 'Guru'
मुझ तक पहुँचने का यक़ीनन रास्ता कोई नहीं
देखा सभी ने है मुझे पर जानता कोई नहीं
Amit Rajvanshi 'Guru'
जा रहे हो छोड़ कर मुझे तो ठीक है
वैसे भी ये दुनिया मेरे काम की नहीं
Amit Rajvanshi 'Guru'
यहाँ तो खेल सारा रौशनी का है
यहाँ दीए के जलने से किसी को क्या
Amit Rajvanshi 'Guru'
घर से निकले थे सब की तरह हम
दरिया तो थे मगर बह नहीं पाए
Amit Rajvanshi 'Guru'

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