Daqiiq Jabaalii

Daqiiq Jabaalii

@Daqiiqjabaalii

Amit Yadav shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Amit Yadav's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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  • Nazm
ये तआक़ुब में फ़क़त अहल-ए-हवस हैं प्यारे
ये भरम छोड़ कि उश्शाक़ बहुत हैं मेरे
Daqiiq Jabaalii
इत्तिफ़ाक़न जो कभी मिल गए हँस बोल लिए
इस से ज़्यादा नहीं मेरा कोई रिश्ता उस से
Daqiiq Jabaalii
ख़ुद आप देखें कि किस तरह खप रहा है हर दिन कमाने में ज़र
फ़साद है और कुछ नहीं है बशर की ख़ातिर ज़माने में ज़र
Daqiiq Jabaalii
गिराँ थी क़ल्ब-ए-मुफ़क्किर पे खोखली गुफ़्तार
इसी लिए तो न ताख़ीर तक चली गुफ़्तार

हम अपने दिल का शग़ब दिल में रख के लौट गए
कि कर के ख़ुश थे अहिब्बा सड़ी गली गुफ़्तार
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Daqiiq Jabaalii
ज़िक्र करता था जो दिन भर उस का
हिज्र में मर गया शायर उस का

सुनता रहता हूँ पशेमाँ हो कर
ज़िक्र जब करते हैं दीगर उस का
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Daqiiq Jabaalii
ज़ीस्त की सम्त से ताज़ीर बराबर आई
पर मुबीं होता नहीं ग़लती हमारी क्या है
Daqiiq Jabaalii
क़ल्ब कुछ इसलिए वाशाद नहीं दुनिया में
मेरी तासीर के अफ़राद नहीं दुनिया में

हब्स हर साँस ब-इफ़रात हुआ जाता है
गोया मौजूद कहीं बा'द नहीं दुनिया में
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Daqiiq Jabaalii
बच गया ख़ारों से तो गुल ने मुझे मार दिया
उन निगाहों के तग़ाफ़ुल ने मुझे मार दिया

जल्द लुट जाएगी उफ़ दौलत-ए-दीद-ए-जानाँ
यक-ब-यक उट्ठे तख़य्युल ने मुझे मार दिया
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Daqiiq Jabaalii
ख़ुदाया वस्त-ए-तकल्लुम बहुत सुकून मिला
जब उन लबों ने कहा तुम बहुत सुकून मिला
Daqiiq Jabaalii
इधर पे हम हैं फ़क़त तुझ को जानते हैं 'दक़ीक़'
तिरी तो इस से भी उस से भी आशनाई है
Daqiiq Jabaalii
आख़िरश क्यूँ करें ज़ाईदा नया तिफ़्ल 'अमित'
इस सेे बढ़िया है पिदर-मुर्दा उठा लाएँ कोई
Daqiiq Jabaalii
दुख दे रही है ज़िंदगी तो तुम ही बताओ
कैसे भला मैं प्यार भरे गीत लिखूँगा
Daqiiq Jabaalii
बच्चों की तरह आज बहुत फूट के रोए
हम इतने परेशाँ थे कि फिर टूट के रोए
Daqiiq Jabaalii
मज़ाक उड़ाते हो ये कह के तुम ग़रीबों का
कि सिर्फ़ पैसों से सब कुछ ख़रीद नइँ सकते
Daqiiq Jabaalii
मेरे क़रीब आ ज़रा नज़रें उतार दूँ
ये ज़ुल्फ़ें क्या हैं ला तेरी किस्मत सँवार दूँ

बैठी रहो यूँँ ही मेरी नज़रों के सामने
तुम को निहारते हुए 'उम्रें गुज़ार दूँ
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Daqiiq Jabaalii
वो दौर है तेज़ाब से दिल साफ़ करना पड़ता है
अब डुबकियाँ गंगा के पानी में लगाना छोड़ दो
Daqiiq Jabaalii
एक बच्चा ठंड में बाहर ठिठूर कर मर गया
मख़मली चादर को ओढ़े सोए थे भगवान जी
Daqiiq Jabaalii
रोज़ ये सोचता हूँ तुझ को नहीं सोचूँगा
आज का दिन भी तुझे सोचने में गुज़रा है
Daqiiq Jabaalii
मान जाओ न मुहब्बत से रखूँगा तुम को
वा'दा करता हूँ हिफ़ाज़त से रखूँगा तुम को

तोड़ कर चाँद सितारे तो नहीं ला सकता
इतना कह सकता हूँ इज़्ज़त से रखूँगा तुम को
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Daqiiq Jabaalii
नमक जराहतों पे मेरे मल गए तुम भी
हबीब ग़ैरों के जैसे निकल गए तुम भी
Daqiiq Jabaalii

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