Dharamraj deshraj

Dharamraj deshraj

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Dharamraj deshraj shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Dharamraj deshraj's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
लोग भूलेंगे मुहब्बत जिस दिन
बस उसी रोज़ क़यामत होगी
Dharamraj deshraj
ज़िन्दगी का नहीं था जब मक़सद
मौत का इंतिज़ार था मुझ को
Dharamraj deshraj
ज़िन्दगी तू आज़माना छोड़ दे
मौत से कह दे बहाना छोड़ दे

फूँकने के काम वो आता मकाँ
जब परिंदा आशियाना छोड़ दे

यार क़िस्मत से भी भागा है कोई
बे-सबब आँसू बहाना छोड़ दे

छोड़ दूँ उस की गली उस का नगर
वो मिरे ख़्वाबों में आना छोड़ दे

यार तू माता-पिता को रब समझ
हर कहीं भी सर झुकाना छोड़ दे

फूल के बदले जहाँ काँटे मिलें
ऐसे तू रिश्ते निभाना छोड़ दे

चाँद पाने के लिए नादाँ 'धरम'
हो सके तो कसमसाना छोड़ दे
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Dharamraj deshraj
समय हाथों से निकला जा रहा है
परिंदा वक़्त का समझा रहा है

मुसाफ़िर की तरह हम सब यहाँ हैं
कोई आया तो कोई जा रहा है

अभी भी वक़्त है यारो सँभलिए
समय अब आईना दिखला रहा है

जहाँ इंसान भी गायब मिलेगा
अभी बस वो ज़माना आ रहा है

जरा सोचो कि ईमाँ जब न होगा
अभी तो आदमी इतरा रहा है

सलीक़े से हमें रहना ही होगा
भले मौसम हमें भटका रहा है

'धरम' अब तो बुराई छोड़ भी दे
जो दानिशमंद है समझा रहा है
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Dharamraj deshraj
वक़्त के बन ग़ुलाम हम सारे
नक़्शे-पा अपने छोड़ जाते हैं
Dharamraj deshraj
वो तेरा नींद में हँसना भी इक क़यामत है
कभी तो ख़्वाब में हम को भी तू बुलाया कर
Dharamraj deshraj
रेत को मुट्ठी में भर कर तय करें मीलों सफ़र
इस तरह ख़ुशियाँ पहुँचती हैँ यहाँ आवाम तक
Dharamraj deshraj
मेरा मासूम बचपन था भूखा बहुत
लोरियां माँ सुनाती रही रात भर
Dharamraj deshraj
जो दुखाते हैं दिल गरीबों का
वो ग़ुनाहे-अज़ीम करते हैं
Dharamraj deshraj
ख़ुदा के वास्ते बस ये मुक़द्दस काम हो जाए
जो उन के ग़म की दौलत है वो मेरे नाम ही जाए
Dharamraj deshraj
बे-वफ़ा ज़ीस्त बुलबुला निकली
कट गई उम्र आँख मलते ही
Dharamraj deshraj
हम ने सलाम अर्ज़ कहा अपने यार से
वो राम-राम कहके गले से लिपट गया
Dharamraj deshraj
कभी भूल कर भी न मुफ़लिस बताना
मिला है हमें आँसुओं का ख़ज़ाना
Dharamraj deshraj
जो मुमकिन हो तो सीने में बसा लो
ये दिल भी आशियाना चाहता है
Dharamraj deshraj
किस ने दिया है दर्द हमें कुछ पता नहीं
इतना पता है दर्द हमारा है हिचकियाँ
Dharamraj deshraj
दोस्ती की अभी अभी उन सेे
ज़ख़्म हम को अभी से मिलते हैं
Dharamraj deshraj
जिस के सीने में मुहब्बत का ख़ज़ाना होगा
ऐसे इंसान की ठोकर में ज़माना होगा।
Dharamraj deshraj
दर्द सीने में पालकर रखना
शर्त पहली है शा'इरी के लिए
Dharamraj deshraj
कैसे साबित करोगे तुम ख़ुश हो
मुस्कुराना ख़ुशी नहीं होती
Dharamraj deshraj
कर के बुलन्द हौसला निकले जो घर से हम
काँटों ने छोड़ा रास्ता गुज़रे जिधर से हम
Dharamraj deshraj

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