Divyansh "Dard" Akbarabadi

Divyansh "Dard" Akbarabadi

@Divyanshverma

Divyansh "Dard" shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Divyansh "Dard"'s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
तनवीर चली जाती है साया नहीं जाता
इक तरफ़ा मुहब्बत को भुलाया नहीं जाता

कुछ क़हक़हों से ज़ख़्म छिपाए नहीं छिपते
हर टूटती मूरत को बनाया नहीं जाता
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
हमारा प्यार यूँँ ही पाएमाल होता रहा
हर इक सवाल के बदले सवाल होता रहा

जहाँँ में जो भी है उस का लिखा हुआ है अगर
तो क्या हमारा फ़क़त इस्तिमाल होता रहा
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
तू इंतिख़ाब पर अपने ज़रा गुमाँ मत कर
अगर सही न लगूंँ मैं तुझे तो हाँँ मत कर
Divyansh "Dard" Akbarabadi
आप पर हम जो तिलिस्मात करेंगे ही नहीं
ज़ाहिरन आप मुलाक़ात करेंगे ही नहीं

ख़ैर क़िस्मत का लिखा कौन बदल पाया है
ऐसा करते हैं कि हम बात करेंगे ही नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
तब मिरा प्यार उन्हें रास नहीं आया था
अब झुलसते हैं मिरे यार की तस्वीरों से
Divyansh "Dard" Akbarabadi
जानता हूँ मैं कि तुम वा'दा फ़रामोश नहीं
बस तुम्हें याद दिलाने में मज़ा आता है
Divyansh "Dard" Akbarabadi
नदी आँखें भँवर ज़ुल्फ़ें कहाँ तैरूँ कहाँ डूबूँ
कि तेरे शहर में सब की अदाएँ एक जैसी हैं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
बाहम किए इन्हें जो यही ढाल बन गए
आई समझ में टुकड़ों की क़ुव्वत शिकस्ता दिल

ये और बात उस ने किया क़त्ल अहद का
ये और बात ज़िंदा थी निस्बत शिकस्ता दिल
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया
जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे

कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास
लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
क्यूँ मिरे फूल से चेहरे यूँँ है मुरझाया सा
तुझ सा तो बाग़-ए-जहाँ में कोई दूजा भी नहीं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
कितना ग़लत करोगे हुक़ूमत के नाम पर
धंधा बना लिया है इमारत के नाम पर

हर शय में तीस जोड़ के पंद्रह घटा दिए
ये दे रहे हो हम को रियायत के नाम पर
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
बेटे के हाथ में लगी तलवार देख कर
माँ डर गई थी वक़्त की रफ़्तार देख कर
Divyansh "Dard" Akbarabadi
अगर आज मैं ने नहीं रोका तुम को
तो आगे से तुम और रग़बत करोगे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
तुम्हीं तो चले थे ज़माने से हट कर
यक़ीं था तुम इक दिन हुक़ूमत करोगे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
इक तमन्ना अजब शहीद हुई
ज़िंदगी मौत की मुरीद हुई

एक दो साल तो लगेंगे उसे
शा'इरी तू भी तो जदीद हुई
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
ऐसे असमंजस में मत डालो मुझे तुम मेरी जान
ठीक से सोचो समझ लो इश्क़ सा है इश्क़ है
Divyansh "Dard" Akbarabadi
प्यार करने की हिम्मत नहीं उन के पास और हम सेे किनारा भी होता नहीं
बात सीधे कही भी नहीं जा रही और कोई इशारा भी होता नहीं

उस को उम्मीद है ऐश होगी बसर साथ में जब रहेगी मिरे वो मगर
मुझ पे जितनी मुहब्बत बची है सखी इतने में तो गुज़ारा भी होता नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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कहा तो उस ने ऐसे मुझ सेे तुम बस मेरा जलवा देखो
कितने पानी में उतरेगा अब की बार वो लड़का देखो
Divyansh "Dard" Akbarabadi
पहले ख़याल रख मिरा मेहमान कर मुझे
फिर अपनी कोई चाल से हैरान कर मुझे

हैं कौन आप, याद नहीं,कब मिले थे हम
इतना भी ख़ुश न होइए पहचान कर मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
जो मैं उस के हिस्से में सारा हुआ तो
फिर इक बार वो सब दुबारा हुआ तो

तिरे ख़्वाब तो ऐश ओ आराम के हैं
मिरे साथ जो बस गुज़ारा हुआ तो
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Divyansh "Dard" Akbarabadi

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