Shadab Asghar

Shadab Asghar

@Dr_Shayar

Shadab Asghar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shadab Asghar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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  • Nazm
दवाई बन नहीं पाई अभी तक
पहेली है वो बीमारी अभी तक

कोई अब पूछने वाला नहीं है
ये रोटी क्यूँ नहीं खाई अभी तक

पिताजी कल ये कह के रो पड़े हैं
कुँवारी है बहन बड़की अभी तक

मुहब्बत कर ही लेता हूँ नई मैं
यही आदत नहीं छूटी अभी तक

ख़ुदा जाने मिरी मिस्टेक क्या है
वो लड़की मुझ सेे है रूठी अभी तक
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Shadab Asghar
चाहे जीतनी भले ही देरी हो
इक़ दुआ है कभी तो पूरी हो

काश हम तुम से हक़ से कह पाते
जान ए जॉ तुम तो सिर्फ़ मेरी हो
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Shadab Asghar
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मुफ़लिस हैं बेचारे हैं हम
देखो इश्क़ के मारे हैं हम

जीत ली हम ने हर इक दुनिया
जब से इश्क़ में हारे हैं हम
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Shadab Asghar
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रफ़्ता रफ़्ता सब कुछ समझ गया हूँ मैं
लोग अचानक टैरेस से क्यूँ कूद गए
Shadab Asghar
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आप सब कुछ देख सकतें हैं अगर
फिर हमारी बेबसी भी देखिए
Shadab Asghar
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बिछड़ते वक़्त भी हिम्मत नहीं जुटा पाया
कभी भी उस को गले से नहीं लगा पाया

किसी को चाहते रहने की सज़ा पाई है
मैं चार साल में लड़की नहीं पटा पाया
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Shadab Asghar
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जितने भी हैं ज़ख़्म तुम्हारे सिल देगी
होटल में खाने का आधा बिल देगी

सीधे मुँह जो बात नहीं करती है जो
तुम को लगता है वो लड़की दिल देगी
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Shadab Asghar
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कभी कभी वो बला की हसीन लगती है
कभी कभी तो उसे देखने का जी न करे
Shadab Asghar
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तलाश हम को किसी भी बदन की है ही नहीं
हवस की भूख हमारे ज़ेहन की है ही नहीं

किसी से बिछड़े तो कोई फ़ना नहीं होता
क़ज़ा की बात तो अब के ज़मन की है ही नहीं
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Shadab Asghar
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पराए मुल्क में पैसा नहीं बनाऊँगा
मैं तुम को छोड़ के दुनियां नहीं बनाऊँगा

मैं अपने शौक पुराउंगा अपने पैसों से
ज़मीन बेच के बंगला नहीं बनाऊँगा
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Shadab Asghar
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हम तुम्हें जान जान कहते थे
जान तो सब की जानी होती है
Shadab Asghar
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दुआ में माँग लूँ मैं उस को लेकिन
फ़क़त पाना मेरा मक़सद नहीं है
Shadab Asghar
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कोई तो हल निकालो मस अले का
मुझे उन से मुहब्बत हो गई है
Shadab Asghar
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कैसे ये मान लें तू लकीरों में नहीं है
हम ने भी कह दिया है तेरा हो के रहेंगे
Shadab Asghar
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कटी उम्र सारी वफ़ा करते करते
किसी की मुहब्बत अदा करते करते

वो थकता नहीं है ज़फा करते करते
मैं थकती नहीं हूँ दुआ करते करते
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Shadab Asghar
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बा'द में तुम से इश्क़ कर लेंगे
पहले ख़ुदस तो प्यार कर लें हम
Shadab Asghar
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अक़्लमंदों के बस की बात नहीं
इश्क़ अन्धों का खेल है बेटा
Shadab Asghar
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तुझ से बिछड़ा तो मर न जाऊँ कहीं
तू मुहब्बत नहीं है , आदत है
Shadab Asghar
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कलेंडर, दिन ,महीने साल बदले और इक मैं हूँ
मुझे कल भी मुहब्बत थी, मुझे अब भी मुहब्बत है
Shadab Asghar
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उन आँखों पर शे'र कहे जा सकते थे
उन आँखों में डूब ने से गर बच जाते
Shadab Asghar

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