Subrat Tripathi

Subrat Tripathi

@Guruji

Subrat tripathi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Subrat tripathi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
कोई मुखड़ा नहीं जचता
कोई तुम सेा नहीं लगता

तुम्हारे बिन मुझे कोई
सफ़र अच्छा नहीं लगता
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Subrat Tripathi
आँखें जब बूढ़ी होती है
ठेस अंगूठा सह लेता है
Subrat Tripathi
धीरे धीरे महफ़िलों की शान होती जाएगी
दोस्त जिस को कह रहे हो जान होती जाएगी
Subrat Tripathi
किसी के छोड़ जाने की हमें तकलीफ़ है मालूम
जिसे भी चाहता था मैं मुझे वो छोड़ देता था
Subrat Tripathi
हादसों के ज़द में ही ये कट रही है ज़िंदगी
उम्र लेकिन बढ़ रही पर घट रही है ज़िंदगी
Subrat Tripathi
और बचा ही क्या पढ़ने को
उस की ऑंखें पढ़ आया हूँ
Subrat Tripathi
वो कहानी मुँहजुबानी याद अब तक है हमें
जो हमारे होंठ पर थे होठ रख तुम ने कहें
Subrat Tripathi
ख़ुदा की दी हुई नेमत लकीरें हाथ में सब है
तुम्हीं को छोड़कर के बस हमारे साथ में सब है

कहे थे हाथ मेरे देख कर के इक नज़ूमी ने
कि मेरे भाग्य में कुछ भी नहीं पर हाथ में सब है
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Subrat Tripathi
याद कर ज़ख़्मों को अपने डाइरी भरनी पड़े
इस क़दर मत चाहना की शा'इरी करनी पड़े
Subrat Tripathi
तुम सेे बिछड़े कई महीने बीत गए हैं
मगर तुम्हारा नंबर अब तक सेव रखा है
Subrat Tripathi
और क्या ही था हमारे पास देने को तुम्हें
ख़्वाब मेरे आँख के तुम को मुबारक हो सनम
Subrat Tripathi
कहा था तैश में आ कर कि मुझ को भूल जा तू
कहाँ तक शा'इरी से ज़िंदगी गुज़रे समझ ना
Subrat Tripathi
बिन तख़ल्लुस के कहीं उनवान हो जाता है क्या
पेट जिस ने भर दिया भगवान हो जाता है क्या
Subrat Tripathi
क़स
में तुम तो नहीं खाती थी
फिर भी तुम ने छोड़ दिया था
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Subrat Tripathi
लिखेंगे गीत एक आशिक़ सभी जो गुनगुनाएँगे
उसे सुन कर तुम्हें फिर और फिर हम और चाहेंगे
Subrat Tripathi
किए थे पाप जितने भी बुरे सदक़ा उतारा था
हज़ारों मुश्किलों की जद में रिश्ता हमारा था

गिरे थे भाव सोंनें और चाँदी के मिनट भर में
उसनें जब भरी बाज़ार में झुमका उतारा था
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Subrat Tripathi
किसी की याद में इतना मरा हूँ
किसी की याद अब आती नहीं है
Subrat Tripathi
अब तो तुम्हें ख़्वाब में देखता हूँ
अब तो तुम्हें भी नहीं पा सकूँगा
Subrat Tripathi
सब को ऐसे क्यूँ तकती हो
सबके दिल में क्यूँ रहती हो
Subrat Tripathi
कोई हम को क्यूँँ देखेगा अपनों में
कोई हम को क्यूँँ सोचेगा सपनों में
Subrat Tripathi

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