Hemant Sakunde

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@HemantSakunde

Hemant Sakunde shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Hemant Sakunde's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
तेरा दीदार करना हो हमें तो कैसे मुमकिन हो
भले हो साथ तस्वीर-ए-ख़याली तेरी लेकिन हो

अधर यूँँ मौन रख कर बस हमें सुनती रहोगी क्या
कभी तस्वीर हाल-ए-दिल कहे ऐसा भी इक दिन हो
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Hemant Sakunde
इक नौका उस के दिल के तट पर ख़ाली था
इक इच्छा थी मेरी भी माँझी बनने की
Hemant Sakunde
है सफ़र ये वाक़'ई में दूर या
हम सफ़र हम ने ग़लत फिर से चुना
Hemant Sakunde
निज़ाम-ए-दहर को तो अब नहीं हम रोक सकते पर
तुझे क्या जल्दी थी इस पुष्प को मुरझाने की मौला
Hemant Sakunde
चाँद को चाहना मना है क्या
रात में डूबना फ़ना है क्या

टूट कर गिर गए सितारे गर
ढूँढ़ कोई नया बना है क्या
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Hemant Sakunde
सोचता हूँ छोड़ दूँ अब शे'र कहना
सोच कर इक शे'र कैसे चुप रहूँ मैं
Hemant Sakunde
आरसी के उस तरफ़ कोई ख़फ़ा था
आज आँखें भी न मुझ सेे वो मिलाता
Hemant Sakunde
सब राज करना चाहते जिस क़ल्ब पर
उस पर सियासत तो हमारी ही रही
Hemant Sakunde
बस इक तलब थी उस समय इरशाद की
कुछ शे'र हम को भी सुनाने थे उसे
Hemant Sakunde
ख़ामोश साया रोकना चाहे तुझे
रुककर ज़रा उस की दशा तो देखले
Hemant Sakunde
ऐ ख़ुदा अब तो फ़रिश्ते भेज दे
या लकीरें सब मिटा दे हाथ की
Hemant Sakunde
दूर से तो राह आसाँ सी लगी
जब चले, काँटे चुभे पैरों तले
Hemant Sakunde
वो माँगते हम सेे हमारी ज़िंदगी
हम तब थमा देते हमारी वो क़लम
Hemant Sakunde
उस फूल से ख़ुशबू चुरा लूँ मैं अगर
दो चार काँटे भी चुभे तो डर नहीं
Hemant Sakunde
क़ुदरत अचानक क्यूँ हसीं लगने लगी
ये इक नई मुस्कान उल्फ़त तो नहीं
Hemant Sakunde
ऐ ख़ुदा कोई नया कर्तब बता दे
इस पुराने नाच से मन उठ गया है
Hemant Sakunde
कस्बों को हम क़स
में देकर निकले
शहरों में हम सपने ले कर आए
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Hemant Sakunde
पल में होते आँसू ओझल
डरते हैं लोगों से मिल कर
Hemant Sakunde