Jagveer Singh

Jagveer Singh

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Jagveer Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Jagveer Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
मज़हब पर आ जाए बात तो बस्ती जलती है
रेप अगर हो तो सिर्फ़ मोमबत्ती जलती है
Jagveer Singh
रात कटी नींद की दवाई पर
ख़्वाब पड़े रह गए रज़ाई पर

और किसी से शादी सोची तो
मारा जाएगा वो सगाई पर
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Jagveer Singh
रस्सी चाक़ू कहते मुझ को अक्सर
बेहतर होगा ग़लत क़दम उट्ठा ले
Jagveer Singh
नींद की गोली जैसे सारे अखबार
सोचो फिर ये जनता कैसे जगेगी

मुझ को उन रंगों का लम्स लगा है
जिन से बस तेरी तस्वीर बनेगी
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Jagveer Singh
ख़ुदा भी देख ले गर ज़र्फ़ मेरा तो करेगा वाह
उन्होंने ख़ुद-कुशी कर ली जिन्हें था मुझ सेे आधा दुख

यही बस इक सहूलत आदमी होने पे है 'जगवीर'
कि औरत को ज़माने ने दिए हैं हम सेे ज़्यादा दुख
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Jagveer Singh
ऊपर से दिखती है जितनी प्यारी दुनिया
अंदर उतनी हिर्स-ओ-हवस की मारी दुनिया

दुनिया से ऊपर उठकर दुनिया देखूँ तो
हैरत होती है कितनी बेचारी दुनिया
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Jagveer Singh
ख़ुदा तुझे क़सम है तेरी प्यारी काइनात की
बता भी दे वबा-ए-इश्क़ ठहरी कौन ज़ात की

मुझे ये ख़ुद पे फ़ख़्र होता है कि मेरे शे'र सुन
कई सी लड़कियों ने मुझ सेे खुल के कितनी बात की
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Jagveer Singh
बस एक क़ैफियत ही मुसलसल सी तारी है
लम्हात-ए-शाद में भी उदासी तू जारी है
Jagveer Singh
सच कहने से पहले इतराते थे
जब तेरे नाम की क़सम खाते थे

एक गली देखी तो आया ये याद
एक पते पर मेरे ख़त जाते थे
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Jagveer Singh
ये नहीं कहना है जाँ पर लग रहा है
मुझ को तुम सेे अब बड़ा डर लग रहा है

दूर हो कर मुझ सेे ये बोली उदासी
पहले से अब काफ़ी बेहतर लग रहा है
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Jagveer Singh
मेरी दुनिया जैसे इक सर
यूँ का तट है
मैं तो राम नहीं पर यार मिरा केवट है

राधा मोहन में कितना भी झगड़ा हो पर
समझौता करने को यमुना का पनघट है
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Jagveer Singh
ता'रीफ़ किसे तो किसे तनक़ीद मुबारक
सब को सभी की आख़िरी उम्मीद मुबारक

देरी से सही जान निकल तो गया है चाँद
ऐ चाँद के टुकड़े तुझे ये ईद मुबारक
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Jagveer Singh
ऐसे पत्थर भी न तोड़े
जैसे तुम ने दिल को तोड़ा

उस को देखा रस्ते में फिर
हम ने अपना रस्ता मोड़ा
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Jagveer Singh
गांधी के जीवन से नहीं तो मौत से तो सीखिए
पाँवों को छूने वाला गोली भी चला सकता है दोस्त
Jagveer Singh
सफ़र पर हैं सौ दागिने दाग़ कर
हमें नींद भी आई तो जाग कर

नहीं रास आई ग़ज़ल अब उसे
उसे शादी करनी थी तब भाग कर
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Jagveer Singh
तेरी इक झलक से मेरा दिन बने है
अहिल्या को बस राम का लम्स काफ़ी
Jagveer Singh
ज़मीन पर मनुष्य को ही ख़तरा है मनुष्य से
यहाँ-वहाँ मनुष्य डरता फिरता है मनुष्य से

ख़ुदा ने भूक और मनुष्य ने बनाया इश्क़ को
ख़ुदा का काम ज़्यादा जानलेवा है मनुष्य से
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Jagveer Singh
ख़ुदा तुझ को ज़रा मालूम भी है क्या
यहाँ क्या-क्या हुआ है तेरे कुन के बा'द
Jagveer Singh
दास्ताँ बस यही है मेरी
रह गई दास्ताँ में कमी

ज़िन्दगी भर का वा'दा था ना
ज़िन्दगी भर गई क्या तेरी
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Jagveer Singh
मकाँ मालिक किराएदार बन जाते
किराएदार जब सरकार बन जाते

ये जनता राज में ही ख़ासियत है बस
कि अपराधी यहाँ सरदार बन जाते
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