Janib Vishal

Janib Vishal

@Janibvishal

Janib Vishal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Janib Vishal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
ज़ब्त-ए-औक़ात भी औक़ात में आ जाता है
बात उस की हो तो दिल बात में आ जाता है

मौसम-ए-गुल भी बहाना है नहीं आने को
आने वाला भरी बरसात में आ जाता है
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Janib Vishal
किसी ने जब गए दिन का पता पूछा
लगा ऐसा कि कोई हादिसा पूछा

हमीं थे राह भटके लोग हैरत है
हमीं से मंज़िलों ने रास्ता पूछा
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Janib Vishal
ये जो मैं हूँ तुम्हारा हूँ तुम्हारा बस तुम्हारा
ये जो तुम हो जहाँ के हो मगर मेरे नहीं हो
Janib Vishal
मैं ने कुछ और कहा था तुम कुछ और समझ बैठे
या'नी भोपाल कहा था पर इंदौर समझ बैठे
Janib Vishal
नज़ाकत भी गुलों से कम नहीं उस
में
मगर फिर सख़्त भी इतना कि पूछो मत
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Janib Vishal
आँख दरिया बने पर तमाशा न हो
जो हुआ सो हुआ घर तमाशा न हो

दिल भी टूटे अगर टूटे फिर इस क़दर
बात अंदर हो बाहर तमाशा न हो
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Janib Vishal
जान की बाज़ी अगर होती तो कोई बात होती
इश्क़ कर के तुम मिरा बस वक़्त भर जाया करोगे
Janib Vishal
हुई है जिस को भी कहता है लानत है मुहब्बत
नज़र की नींद से समझो बग़ावत है मुहब्बत

अगर पूछे ज़माना इक बला जो ख़ूब-सूरत
दबा कर गाल कह देना मुहब्बत है मुहब्बत
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Janib Vishal
साल-दर-साल दिल तोड़ती आई है
फ़रवरी का ये रोना नया तो नहीं
Janib Vishal
मैं नहीं मानता जा तिरी बंदगी
तू ख़ुदा है अगर सामने आ के मिल
Janib Vishal
ये बहार-ए-सोग के ग़मनाक मंज़र मिल रहे हैं
हम अगर ख़ुश मिल रहे तो ग़म छुपाकर मिल रहे हैं
Janib Vishal
यार तुझ को ख़ुदा का हवाला न दे
ज़हर दे रुख़्सती का पियाला न दे

क़ब्र मंज़ूर है तेरे दिल में मगर
इस तरह इश्क़ को दिल निकाला न दे
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Janib Vishal
इन्तिख़ाब-ए-इन्तिज़ार-ए-ज़न्न है दो में से किस का
मौत ने भी और उस ने भी कहा है हम मिलेंगे
Janib Vishal
जो राज़ दिल में है दबा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर
मैं ज़िंदगी को भी दगा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर

तेरा वो बोसा अब भी मेरी अक़्ल से जाता नहीं
हर इक निशां तेरा मिटा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर
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Janib Vishal
किसी शाम आना वहीं शाम ले कर
मुहब्बत, शिकायत भरा काम ले कर

उसी झील के छोर अब तक जहाँ पर
दिया जल रहा है तिरा नाम ले कर
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Janib Vishal
ज़िन्दगी जीत है, हार हरगिज़ नहीं
फूल का भी ये श्रृंगार हरगिज़ नहीं

दर्द हो या भले पीर पर्वत-सी हो
मौत है हम को स्वीकार हरगिज़ नहीं
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Janib Vishal
इक कहानी है, वो भी मुकम्मल नहीं
आँख पानी है, वो भी मुकम्मल नहीं

मर तो जाना है तुम सेे बिछड़ कर, मगर
मौत आनी है, वो भी मुकम्मल नहीं
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Janib Vishal
वहीं घर फ़ोन से वो प्यार देती है मुझे अपना
बिगाड़ा हो गया इतना कि मिलने आ नहीं सकती
Janib Vishal
कौन है जो इस तरह अपना ही क़ातिल देखता है
रास्ते चलता मुसाफ़िर अपनी मंज़िल देखता है

ये निगाहें केश नथनी झुमके सारे हैं कहानी
फिर ग़ज़ल लिखता है जो उस का हसीं तिल देखता है
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Janib Vishal
दिल के रंगीले उपवन में
सुंदर फूलों के कानन में

वो हमराही हम-दम मेरी
देवी-सी बैठी है मन में
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Janib Vishal

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