Kazim Rizvi

Kazim Rizvi

@Kazim_rizvii

Kazim Rizvi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kazim Rizvi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ
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Kazim Rizvi
ये हक़ीक़त है, मज़हका नहीं है
वो बहुत दूर है, जुदा नहीं है

तेरे होंटों पे रक़्स करता है
राज़ जो अब तलक खुला नहीं है

जान ए जांँ तेरे हुस्न के आगे
ये जो शीशा है, आइना नहीं है

क्यूँ शराबोर हो पसीने में
मैं ने बोसा अभी लिया नहीं है

उस का पिंदार भी वहीं का वहीं
मेरे लब पर भी इल्तेजा नहीं है

जो भी होना था हो चुका काज़िम
अब किसी से हमें गिला नहीं है
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Kazim Rizvi
नाज़-ओ-नख़रे क्या उठाए, क्या सुने उस के गिले
देखते ही देखते लड़की घमंडी हो गई

देखते रहने में उस को और क्या होता, मगर
जो थी जान-ए-आरज़ू, वो चाय ठंडी हो गई
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Kazim Rizvi
कोई मातम नहीं करता उस का
मौत से क़ब्ल जो मर जाता है

दिल की चौखट पे सरे शाम अक्सर
कोई आता है, गुज़र जाता है
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Kazim Rizvi
ज़बान काटेंगे हक़ सुनाने पे साहिब-ए-इक़्तेदार, तो क्या
लहू हमारा बग़ैर बोले ज़बाँ दराज़ी किया करेगा
Kazim Rizvi
ये दिसंबर की फ़िज़ाएँ अक्सर
दिल के शोलों को हवा देती हैं

जाने जाँ आज भी ठंडी रातें
अपने माज़ी का पता देती हैं
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Kazim Rizvi
तरीक़ा पूछ रहे थे वो शे'र कहने का
सो मैं ने कह दिया, रातों को देर तक जागो
Kazim Rizvi
रोते रहना हयात है 'काज़िम'
रो न पाएँ, तो घुट के मर जाएँ
Kazim Rizvi
अब किसी और से लाहक़ है मोहब्बत तुझ को
अब किसी और का चेहरा तेरा आईना है

अब नहीं मुझ को मुयस्सर तेरे होंटों की शराब
अब मुझे फिर से वही ख़ून-ए-जिगर पीना है
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Kazim Rizvi
प्याला ए अंगबीन क्यूँ हो तुम
इस क़दर दिल नशीन क्यूँ हो तुम

तुम को देखूं, तो होश खो बैठूँ
यार इतने हसीन क्यूँ हो तुम
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Kazim Rizvi