Maviya abdul kalam khan

Maviya abdul kalam khan

@Maviyaabdulkalam

Maviya abdul kalam khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Maviya abdul kalam khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
गिरता हूँ तो फौरन मुझे उढने नहीं देती
हालात की संगीनी सँभलने नहीं देती
Maviya abdul kalam khan
रुकने का मुझे कोई बहाना नहीं मिलता
ठहरूं मैं कहाँ मुझ को ठिकाना नहीं मिलता

पिन्हाँ है कई दर्द कहानी में मेरे जो
मुझ जैसा किसी का भी फसाना नहीं मिलता
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Maviya abdul kalam khan
चराग़-ए-रौशनी हो कर दर-ए-दिल तक न पहुँचा हूँ
नज़र में हुस्न की यारो अभी तक भी बुझा सा हूँ

ख़बर करना ज़रा क़ासिद हसीं साँसों की धड़कन को
हवा दामन से गर दे वो महकता मैं उजाला हूँ
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Maviya abdul kalam khan
सुकूँ प्यारे उलफ़त का छाया हुआ है
अँधेरा भी घर का पराया हुआ है

तसव्वुर का तेरे ये अदना है जादू
दिया जैसे शब में जलाया हुआ है
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Maviya abdul kalam khan
ज़मीं चाँद व सूरज सितारे ख़ुदा के
हसीं ख़ूब-सूरत नज़ारे ख़ुदा के

खिलाता है सब को ख़ुदा ही तो देखो
जहाँ में सभी को सहारे ख़ुदा के
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Maviya abdul kalam khan
ग़ज़लें तो पढ़ रहे थे वो 'अहमद फ़राज़' की
महफ़िल में लोग मुझ को बड़े चोर लगे हैं
Maviya abdul kalam khan
औरों को अपने ग़म से शनासा न किया कर
इस क़दर ज़िन्दगी का तमाशा न किया कर
Maviya abdul kalam khan
दुआ को ख़ुदाया मेरी बा-असर कर
मुझे साजिशों से सदा बा-ख़बर कर
Maviya abdul kalam khan
रह कर के भीड़ में भी जो तन्हा हुआ हूँ मैं
कैसे बताऊँ यार के टूटा हुआ हूँ मैं

मुझ को कहाँ कहाँ से समेटोगे तुम भला
अपनों के दरमियान जो बिखरा हुआ हूँ मैं
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Maviya abdul kalam khan
तन्हा ही लड़ रहा हूँ मैं हालात से यहाँ
कहने को मेरे साथ में सारा जहान है
Maviya abdul kalam khan