MIR SHAHRYAAR

MIR SHAHRYAAR

@Mir_Shahryaar_

MIR SHAHRYAAR shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in MIR SHAHRYAAR's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
अपनी हालत से डर गया शायद
होश आते ही मर गया शायद

कर रहा था मैं जिस गली से गुरेज़
दिल वहीं से गुज़र गया शायद
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MIR SHAHRYAAR
कहाँ से आया है ये कौन है
जो ऐसे शोर में भी मौन है

नहीं बचने की गुंजाइश कोई
यहाँ तो मूसा ही फिरऔन है
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MIR SHAHRYAAR
मैं कब तक तितलियों के साथ झूमूँ
बिछड़ मुझ से मुझे हैरान तो कर
MIR SHAHRYAAR
तू तो फिर भी तू है अपनी ज़ात पर शक है
बात ये है अब मुझे हर बात पर शक है
MIR SHAHRYAAR
तेरे ख़याल में थे गुम अपना ख़याल किस को था
ऐसी भी बे-ख़याली का यार मलाल किस को था
MIR SHAHRYAAR
कई हफ़्तों से अपने कमरे में
अपने साए से लड़ रहा हूँ मैं
MIR SHAHRYAAR
या तो कुछ भी नहीं रहा बाक़ी
या सिमट आया बहर-ओ-बर मुझ में

मैं कि इक सानिहा हूँ लम्हों का
होता क्या क्या है लम्हा-भर मुझ में
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MIR SHAHRYAAR
आँखें भी और ख़्वाब भी रख लो
ये लो ख़ुशबू गुलाब भी रख लो
MIR SHAHRYAAR
किस तरह हम बिखर गए जानाँ
सब दुआ बे-असर गए जानाँ

मैं तो ख़ुश था मगर ये चारा-गर
मुझ को बर्बाद कर गए जानाँ
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MIR SHAHRYAAR
चाँदनी रातों में मिरे महताब
दिल को शब-ज़ाद कर रहा हूँ मैं

तन्हा तन्हा ही अपने कमरे में
ग़म ही ईजाद कर रहा हूँ मैं
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MIR SHAHRYAAR
बहुत क़रीब भी हैं दूर दूर भी हैं बहुत
तू मह है बाम पे मैं ज़ेर-ए-बाम हूँ जानाँ
MIR SHAHRYAAR
फिर हो रही है रुख़्सत उस की महक यहाँ से
ये कमरा ये जहाँ फिर सुनसान होने को है
MIR SHAHRYAAR
गजरा देखो कंगन देखो
कैसी सजी है दुल्हन देखो

उलझी उलझी खोई खोई
कब से बैठी है बिरहन देखो
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MIR SHAHRYAAR
जी ही जी में कई अहद-ए-वफ़ा करते-करते
जी ही जी में वो कई बार मुकरता होगा

जाने किस ध्यान में बैठा हुआ होगा वो शख़्स
जाने किन रंगों से कमरे को वो भरता होगा
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MIR SHAHRYAAR
ज़रूरत थी बस बात करने की हम को
मगर बात करने की फ़ुर्सत किसे है

अब इस बस्ती में सब ख़ुदा बन गए हैं
अब इक दूसरे की ज़रूरत किसे है
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MIR SHAHRYAAR
आकाश में भी गूँजते हैं गीत प्यार के
आओ पिया कि आए हैं अब दिन बहार के

ये दिन वहीं हैं जिन का हमें इंतिज़ार था
मौसम गुज़र गए हैं सभी इंतिज़ार के
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MIR SHAHRYAAR
मैं अगर ज़ाए हूँ तो उस पे क्या हैरत भला
मैं मोहब्बत था मुझे राएगाँ तो होना था
MIR SHAHRYAAR
मेरे होने को होना तुम ने किया
भूरी मिट्टी को सोना तुम ने किया
MIR SHAHRYAAR
सर-ए-बाम था मेरे ख़्वाबों का चाँद आज
महकते रहे सारे मन के दरीचे

बरसते रहे यादों के गहरे बादल
खुले थे सहर तक सुख़न के दरीचे
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MIR SHAHRYAAR
फूल देखता हूँ तो उस की याद आती है
उस की ख़ुशबू ऐसी थी उस का नाम ऐसा था

उस को सोचता हूँ तो मय-कदे में होता हूँ
उस की आँखें ऐसी थीं उस का जाम ऐसा था
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MIR SHAHRYAAR

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