MOHSIN JAHANGIR

MOHSIN JAHANGIR

@MohsinKhan

MOHSIN JAHANGIR shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in MOHSIN JAHANGIR's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher
अच्छे ख़ासे को कासिर कर देता है
इश्क़ इंसान को काफ़िर कर देता है
MOHSIN JAHANGIR
मुहब्बत में रोना लिखा था
तुझे उस का होना लिखा था
MOHSIN JAHANGIR
कहानी में नया मोड़ आएगा
तुझे वो शख़्स भी छोड़ जाएगा
MOHSIN JAHANGIR
ज़रा सी चोट से टूट जाता है
हमारा दिल है या काँच का टुकड़ा
MOHSIN JAHANGIR
कुछ लोग दिल से उतर गए हैं
यूँँ लगता है जैसे मर गए हैं
MOHSIN JAHANGIR
फूल सब को ही प्यारा था
काँटों ने क्या बिगाड़ा था
MOHSIN JAHANGIR
मुझे तुम सेे मोहब्बत अब नहीं जानाॅं
तुम्हारी याद तक मुझ को नहीं आती
MOHSIN JAHANGIR
इश्क़ की आग मैं जल जाऊँगा मैं
इक तेरी याद मैं ढल जाऊँगा मैं
MOHSIN JAHANGIR
कुछ तो जीने का सहारा होता
वो जो इक शख़्स हमारा होता
MOHSIN JAHANGIR
बेचैनियों में गुम है तन्हाइयों में गुम है
इक शख़्स है जो मेरी परछाइयों में गुम है
MOHSIN JAHANGIR
शे'रो पर शे'र लिखे जाते हैं
ये शाइ'र बाज़ कहाँ आते हैं
MOHSIN JAHANGIR
मुहब्बत यार तुम को भी रुलाएगी
तुम्हारे भी बदन को ख़ाक कर देगी
MOHSIN JAHANGIR
बड़ी ही याद आती है मुझे गुज़रे ज़माने की
किसी को याद रखने की किसी को भूल जाने की
MOHSIN JAHANGIR
रस्ता यूँँ मुश्किलों का भी है निकाला हम ने
दिल जला कर किया है घर में उजाला हम ने
MOHSIN JAHANGIR
कमरा वीरान हुआ जाता है
एक बस तेरे चले जाने से
MOHSIN JAHANGIR
ज़ख़्म सारे ही भर जाते तो अच्छा था
हम जो होते ही मर जाते तो अच्छा था
MOHSIN JAHANGIR
साथ हो तुम साथ मेरे ज़िन्दगी की तरह
चाहते हो क्यूँ मुझे तुम अजनबी की तरह
MOHSIN JAHANGIR
दूर तुम सेे एक पल मैं रह नहीं सकता
प्यार कितना है ये तुम सेे कह नहीं सकता
MOHSIN JAHANGIR
मोम था दिल मेरा
उस ने पिघला दिया
MOHSIN JAHANGIR
तिरे इनकार में शायद तिरी हाँ थी
यही इक बात मुझ को खाए जाती है
MOHSIN JAHANGIR

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