Mukesh Guniwal "MAhir"

Mukesh Guniwal "MAhir"

@Mukeshguniwal

Mukesh Guniwal "MAhir" shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mukesh Guniwal "MAhir"'s shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

4

Content

33

Likes

40

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
भाव समर्पन और मुहब्बत देखी ही नइँ
तुम ने बदन से आगे औरत देखी ही नइँ
Mukesh Guniwal "MAhir"
अभी रोटी कमाने में लगे हैं
ये जो दुनिया बदलना चाहते थे
Mukesh Guniwal "MAhir"
जूते में कंकर सा कोई कल इक चुभा
और फिर तू आ गया मेरे ज़ेहन में
Mukesh Guniwal "MAhir"
मारना रावण को हर दम ही सरल है
जो विभीषण साथ हो लंका दहन में
Mukesh Guniwal "MAhir"
अब ज़ेहन ही दुरुस्त है नइँ दिल ठिकाने पर
पगला गए हैं लौट कर उस की गली से हम
Mukesh Guniwal "MAhir"
ये लोग उन के नाम पे क्या क्या न कर रहे
मिल कर कहेंगे राम से औ जानकी से हम
Mukesh Guniwal "MAhir"
अब मुझे दौलत ज़ियादा चाहिए है
जेब सिल दी किस ने ये मेरे कफ़न में
Mukesh Guniwal "MAhir"
यार कोई तो नया सा दर्द दो तुम
अब नयापन चाहिए तर्ज़-ए-सुख़न में
Mukesh Guniwal "MAhir"
दुनिया रूठी तब जा कर एहसास हुआ
आईने को दोस्त बनाया जा सकता था
Mukesh Guniwal "MAhir"
कर्म करूँँ और फल का लालच नइँ रक्खूँ
यार भला ये कैसी बातें करते हो

अपने दम तो इंसाँ हो जाते हो तुम
मुझ सेे ख़ुदा के जैसी बातें करते हो
Read Full
Mukesh Guniwal "MAhir"
तुम थी मेरी और तुम्हारा मैं
थी का मतलब वक़्त से हारा मैं
Mukesh Guniwal "MAhir"