Kabiir

Kabiir

@Poetkabiir

Kabiir shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kabiir's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

2

Content

24

Likes

11

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
समझ अफ़ज़ल उसे ख़ुद को गिरा ये मान लेते हैं
चुने हैं ख़ुद जिसे ख़ुद से जुदा ये मान लेते हैं

ज़रा तुम सादगी इस मुल्क के लोगों की तो देखो
यहाँ कुर्सी पे कोई हो ख़ुदा ये मान लेते हैं
Read Full
Kabiir
छान डालीं सब ही धर्मों की किताबें
अब न वाक़िफ़ कौन मज़हब के रहे हम
Kabiir
या-रब कटे है उम्र हिजरत में मिरी
आख़िर कहाँ पे आब-ओ-दाना है मिरा
Kabiir
लगाओ यूँॅं सियासत में हमारे क़द का अंदाज़ा
कि जिस का हाथ था
मेंगे वहीं मसनद पे बैठेगा
Read Full
Kabiir
ज़ुल्म-ए-सरीह देख के ख़ामोश ही रहे
इंसानियत के क़त्ल में तुम भी शरीक हो
Kabiir
हर सम्त ख़ुशबू की तरह वो बहता है
वो सिर्फ़ मेरा है मुझे जो कहता है
Kabiir
ज़ुल्म इक ख़ुद पे किए मैं जा रहा हूँ
यूँँ-ही बे-मक़्सद जिए मैं जा रहा हूँ

बन गई हैं ज़िंदगी इक ज़हर मेरी
और उस को भी पिए मैं जा रहा हूँ
Read Full
Kabiir
ख़ुद ही से अक्सर तसव्वुर में मैं बातें करता हूँ
इस तरह मैं अपनी ज़ाए सारी रातें करता हूँ
Kabiir
बराबर मक़बरे के दफ़्न हो कर क्या भला होगा
कि उस से सामना जब रोज़-ए-महशर ही तिरा होगा
Kabiir
ज़िंदगी को अपनी यूँँ अज़ाब कर के देखा है
मैं ने इश्क़ उस से बे-हिसाब कर के देखा है

इल्म था मुझे फ़रेब-कार है वो शख़्स पर
मैं ने फिर भी उस का इंतिख़ाब कर के देखा है
Read Full
Kabiir
था रंगरेज़ी पे तकब्बुर अब्र को अपनी बड़ा
महबूब से मेरे मिला तो पानी-पानी हो गया
Kabiir
क्या ज़रूरत नाज़नीं को ख़ंजरों की
जब 'अता अब्सार दो, रब ने किए हैं
Kabiir
इन लबों के तो गुनाहों की सज़ा मुझ को दे दी है
उन सितम का क्या जो हम पे तेरी नज़रों ने किए हैं
Kabiir
ज़िंदगी मिरी मुल्हिद की तरह बसर यूँँ है
हश्र में मिरा तुझ से सामना न हो या रब
Kabiir