Kanz Al Rida

Kanz Al Rida

@Qabeeh27

Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
ये रूह भी जिस्म से मेरे बस जुदा चाहता है
मुझ सेे वो अब इश्क़ में बस मेरा ख़ुदा चाहता है
Kanz Al Rida
इश्क़ बाज़ी में कोई मुक़द्दर नइँ
और मोहब्बत का कोई सिकंदर नइँ
Kanz Al Rida
मोहब्बत में ही होता शिर्क अगर जाइज़
तो फिर सज्दे में ये सारा जहाँ होता
Kanz Al Rida
लाज़मी हो आबरू-ए-इश्क़ ऐसा हो क़रीना
काश क़दमों में मैं सर रख सकता सुल्तान-ए-मदीना
Kanz Al Rida
जिस के होंटों पे थी मेहर-ओ-मोहब्बत
उस की हाथों पे अब मेहँदी लगी है
Kanz Al Rida
इश्क़ में खुदको बर्बाद तो कर चुका
अब मुझे तेरी कोई ज़रूरत नहीं
Kanz Al Rida
इश्क़ में तो बे-वफ़ाई कर नहीं सकता कभी
चाहो तो तुम आज़्मा कर देख सकते हो मुझे
Kanz Al Rida
हिस्से मिरे वो रात आया ही नहीं
मेरे कभी वो हात आया ही नहीं
Kanz Al Rida
क़िस्सा मोहब्बत का सुनाओ मत मुझे
बे-इश्क़ इक हारा हुआ आशिक़ हूँ मैं
Kanz Al Rida
छोड़ भी दे अब दु'आओं में माँगना
सब्र रख जो भी ख़ुदा देता है तुझे
Kanz Al Rida
ज़रा से हुस्न पर ही वो अकड़ ऐसे रही है
कि जैसे हम किसी और को कभी देखे नहीं हैं
Kanz Al Rida
किसी के इश्क़ के क़ाबिल नहीं लेकिन
किसी के इश्क़ में तो मुब्तला हूँ मैं
Kanz Al Rida
मैं तो अब इस लिए चुप रहता हूँ हर वो जगह में भी
मिरे आवाज़ में तो शोर-आवर कुछ ज़ियादा है
Kanz Al Rida
सभी का इश्क़ अच्छा है
मिरा तो इश्क़ सच्चा है
Kanz Al Rida
उस के लिए कानों का झुमका लाया था मैं शहर से
लेकिन उसे देने कि भी हिम्मत नहीं होती मुझे
Kanz Al Rida
कोई हम को आज़माया हम किसी को आज़माए
ज़िंदगी दो की तो गुज़री आज़माते आज़माते
Kanz Al Rida
फ़ासलों का ही था वो दीवार कैसे तोड़ सकते
ईश्क ना होता तो टूटे दिल को कैसे जोड़ सकते
Kanz Al Rida
किसी सूरत भी मैं तो बद-दु'आ तो कर नहीं सकता
दिए जो ज़ख़्म मैं वो भी अदा तो कर नहीं सकता
Kanz Al Rida
सुलझे हुए लोगों को तो उलझा हुआ लगता हूँ मैं
उलझे हुए लोगों को तो सुलझा हुआ लगता हूँ मैं
Kanz Al Rida
चाह कर के भी तुझे मैं ये बता सकता नहीं
है मुझे तुझ सेे मोहब्बत भी जता सकता नहीं

मैं लिए फिरता हूँ नाकामी मोहब्बत में मगर
आशिक़ी में तो निकम्मा मैं बता सकता नहीं
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