Sandeep Thakur

Sandeep Thakur

@SandeepThakur

Sandeep Thakur shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sandeep Thakur's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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2002

Shayari
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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
मुझ से दो दिन अलग रही है तू
देख तो कैसी लग रही है तू

हो गया राख जल के मैं लेकिन
धीरे-धीरे सुलग रही है तू
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Sandeep Thakur
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गुल सा तू तेरा साथ ख़ुशबू सा
हाथ में तेरा हाथ ख़ुशबू सा

हो के तुझ से जुदा भटकता हूँ
गुल से बिछड़ी अनाथ ख़ुशबू सा
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Sandeep Thakur
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इस नदी की जवानी गिरवी है
क्या बहेगी रवानी गिरवी है

डूबी है बूँद-बूँद कर्ज़े में
बाँध में सारा पानी गिरवी है
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Sandeep Thakur
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आ के नज़दीक मुँह न फेर ग़ज़ल
पास आ बैठ थोड़ी देर ग़ज़ल

सब तेरे नूर से चमकते हैं
लफ़्ज़ मिसरे ख़याल शे'र ग़ज़ल
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Sandeep Thakur
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अनोखा शख़्स था उस से मिलाया हाथ जब मैं ने
लगा जैसे कि उस की उँगलियों में दिल धड़कता था
Sandeep Thakur
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पहले ख़ुद को एक अच्छी जाॅब के क़ाबिल करूँँ
घर ख़रीदूँ कार लूँ फिर पेश तुझ को दिल करूँँ

तू कोई एग्ज़ाम है क्या पास करना है तुझे
तू कोई डिग्री है क्या पढ़ कर तुझे हासिल करूँँ
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Sandeep Thakur
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ज़िंदगी इक फ़िल्म है मिलना बिछड़ना सीन हैं
आँख के आँसू तिरे किरदार की तौहीन हैं
Sandeep Thakur
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पाँव में खनकी चाँदी हो जैसे
उस ने मुंडेर फाँदी हो जैसे

छत पे दो पल मिलन जुदाई में
धूप में बूँदा-बाँदी हो जैसे
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Sandeep Thakur
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कुछ इमोजी वॉलपेपर पर पड़े रह जाएँगे
फ़ोन से जितना मिटा लो चाहे मेरी चैट को
Sandeep Thakur
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सर्च करना है मुझे बे-कार इंटरनेट पर?
धड़कनों में अपनी मेरा नाम कर गूगल कभी
Sandeep Thakur
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हर शे'र हर ग़ज़ल पे है ऐसी छाप तेरी
तस्वीर बन रही है इक अपने आप तेरी

तेरे लिए किसी को इतना दीवाना देखा
लगने लगी है मुझ को चाहत भी पाप तेरी
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Sandeep Thakur
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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
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Sandeep Thakur
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ख़्बाब आँखों में बंद कर लेते
बात गर दिल की चंद कर लेते

आप भी हो ही जाते दीवाने
गर किसी को पसंद कर लेते
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Sandeep Thakur
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तू मिला ही नहीं मगर फिर भी
है बिछड़ने का मुझ को डर फिर भी

जानता हूँ तू आ नहीं सकता
पर सजाया है मैं ने घर फिर भी
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Sandeep Thakur
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दिल के दरवाज़े भेड़ कर देखो
जख़्म सारे उधेड़ कर देखो

बंद कमरे में आईने से कभी
तुम मेरा जिक्र छेड़ कर देखो
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Sandeep Thakur
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आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने
मैं ने दिल की किताब के पन्ने

वक़्त ने देख मोड़ रक्खे हैं
तेरे हुस्नो शबाब के पन्ने
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Sandeep Thakur
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जब मुंडेरों से धूप ढलती है
तो कमी उस की मुझ को खलती है

जो हथेली पे अपनी लिखती थी
दोस्ती प्यार में बदलती है
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Sandeep Thakur
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तेरे जाने के बा'द बस यादें
हर तरफ़ याद-याद बस यादें

सोना, चाँदी, जमीन, घर सब कुछ
हैं मेरी जायदाद बस यादें
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Sandeep Thakur
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इश्क़ से अपने कुछ चुने लम्हें
अनकहे और अनसुने लम्हें

आओ मिल कर जियें दुबारा से
सर्द रातों के गुनगुने लम्हें
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Sandeep Thakur
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फैले हैं क़तरे ओस के घर में
रोया हूँ मन मसोस के घर में

मैं ने पलकें बिछाई थीं लेकिन
चाँद उतरा पड़ोस के घर में
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Sandeep Thakur
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