Saurabh Mehta 'Alfaaz'

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

@Thesaurabhmehta

Saurabh Mehta 'Alfaaz' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Saurabh Mehta 'Alfaaz''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
उन्हें खो कर ये माना हम सिफ़र हैं
मुयस्सर पर उन्हें भी हम कहाँ हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
मुसन्निफ़ हूँ मगर किरदार होता जा रहा हूँ
तसल्लुत अपने ही लिक्खे पे खोता जा रहा हूँ

कहानी में तो इक अंजाम अच्छा ही लिखा था
उसी अंजाम पर पैहम मैं रोता जा रहा हूँ
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Saurabh Mehta 'Alfaaz'
यार सारे, सारे आशिक़ और पुराने मुँह लगे
अब ये कहते फिर रहे हैं कौन उस के मुँह लगे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
ये जो इश्क़–ओ–उल्फ़त वाली भोली-भाली बातें हैं
सुन तुझ को इक बात बताऊँ सारी ख़ाली बातें हैं

हाँ इक ऐसा दौर था जिस
में बातें ख़त्म न होती थीं
अब बातें होने की बातें सिर्फ़ ख़याली बातें हैं
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Saurabh Mehta 'Alfaaz'
ख़ालीपन में काम हमारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा
गुज़रा वक़्त इसी में सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा

ग़ालिब ने क्या ख़ूब कहा था इश्क़ निकम्मा कर डालेगा
इस धंधे में सिर्फ़ ख़सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा
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Saurabh Mehta 'Alfaaz'
ग़ज़ल को कुछ नए चेहरे नए अश'आर देता हूँ
मैं यूँँ अल्फ़ाज़ के ख़ंजर को अपने धार देता हूँ

कभी जब तैश में चाहूँ किसी का क़त्ल करना मैं
तो फिर ग़ुस्से में आ कर शे'र कोई मार देता हूँ
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Saurabh Mehta 'Alfaaz'
इतनी मुश्किल दुनियादारी, और फिर उस पर तेरे ग़म
सारी दुनिया छोड़ के आए, मेरे ही सर तेरे ग़म
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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शिकवे हैं शाने हैं अश्क-ओ-गिर्या है
तुम ना हो तो फिर तो सारी दुनिया है
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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ये मर्ज़ी ख़ुद उसी की है, मुझे क्या वो जिधर जाए
गुज़ारे ज़िन्दगी, गुज़रे यहाँ से, या गुज़र जाए
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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निकलते हैं कफ़न बांधे फ़ना होने की निय्यत से
के संग एक ही उछालेंगे मगर अब के तबीअत से
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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सियाने आदमी हो, इश्क़ के चक्कर में मत पड़ना
तुम्हें बर्बाद कर देगा, तुम्हें अच्छा बना देगा

ख़ुदा चालाक है वो तिश्नगी तो क्या बुझाएगा
बना देगा समुंदर, और उसे खारा बना देगा
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Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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दोनों हैं ख़ामोश, के शायद, दोनों जानिब इकतरफ़ा है
छोड़ो अपने हाल पे इनको, समझो साहिब! इकतरफ़ा है
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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करवट-करवट घूँट-घूँट भर, स्याह रात गुज़री ऐसे
नींद किसी ने तह कर के, अलमारी में रख दी जैसे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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कोई मसरूफ़ियत होगी तुम्हारी
हमें तो तुम सेे ही फ़ुर्सत नहीं है
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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दर्द की कैफ़ियत कैसे कह दें?
बूझो रुख़्सार पे झिलमिल क्या है
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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आज दिल मायूस है ना जाने अब किस बात पे
हर दफ़ा इस को नया कोई बहाना चाहिए
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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बड़ा ही ख़ुश्क है ये हिज्र-ए-आलम, ज़ख़ीरे दोनों अब कम पड़ रहे हैं
यूँँ मुरझाने लगे ख़्वाबों के जंगल, मिरी आँखों से पत्ते झड़ रहे हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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तल्ख़ फब्तियाँ तीखी बातें उस पर तंज़ भरे अश'आर
उन के लब हरकत में आए शहद घुल गया कानों में
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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दहर भर-भर शिकायत के पुलिन्दे हैं ज़ेहन में
लबों पर फिर भी शिकवों का कोई पुर्ज़ा नहीं है
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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परेशाँ से जो आँसू, शब, सिरहाने रख दिए थे
सवेरे फिर बिखर कर, आँख में चुभने लगे हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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