Shubham Rai 'shubh'

Shubham Rai 'shubh'

@_shubham_writes

Shubham Rai 'shubh' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shubham Rai 'shubh''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
कहानी तुम्हारी है हीरो हो तुम
कहाँ कह रहे हम कि ज़ीरो हो तुम
Shubham Rai 'shubh'
तजरबा बस तुम्हें है जीने का
हम ने तो ज़िंदगी गँवाई है

दस्त के आप ही मुसाफ़िर हो
ख़ाक हम ने कहाँ उड़ाई है
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Shubham Rai 'shubh'
साँस लेने के भी पैसे देने होंगे
इस क़दर महँगाई बढ़ती जा रही है
Shubham Rai 'shubh'
ये लोग पूछेंगे हमें
ज़रा ख़राब होने दो

अधर से चूम लेंगे बस
मियाँ शराब होने दो
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Shubham Rai 'shubh'
अभी जंग जारी है हारा नहीं हूँ
कि हथियार अपना उतारा नहीं हूँ

ज़मीं है ये मेरी न ललकारो मुझ को
सुनामी हूँ मैं कोई धारा नहीं हूँ
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Shubham Rai 'shubh'
जो लगेगा मौक़ा तो पूछेंगे हम
इश्क़ ये मरहम है तो किस के लिए
Shubham Rai 'shubh'
किसी पल ये क़िस्मत बदल सकती है
वो सज-धज के घर से निकल सकती है

लगाना है दिल तो सँभल कर ज़रा
किसी की वो अरमाँ कुचल सकती है
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Shubham Rai 'shubh'
सब हो ये वक़्त-ए-रुख़्सत न हो
हो मुलाक़ात आफ़त न हो

तुम तसव्वुर में आती रहो
दिल लगे तुम सेे नफ़रत न हो
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Shubham Rai 'shubh'
किसी हद से गुज़रना चाहता हूँ
तुम्हें छू कर बिखरना चाहता हूँ

किसी दिन पर्दे से मुझ को निहारो
मैं अब सजना सँवरना चाहता हूँ
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Shubham Rai 'shubh'
बीतता वक़्त इक ख़जाना है
क्या नया साल क्या पुराना है
Shubham Rai 'shubh'
सुनाते नहीं थे सुनाना पड़ा है
उसे दर्द मुझ को दिखाना पड़ा है

मुहब्बत सफ़र है मुसाफ़िर हैं हम भी
सो दिल को ठिकाना बनाना पड़ा है
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Shubham Rai 'shubh'
खेल शतरंज के बदलते हैं
दाव असली वज़ीर चलते हैं
Shubham Rai 'shubh'
साथ क्या हम चले कुछ क़दम
दोस्त लगने लगे सारे ग़म

बात चलने लगी आप की
हँसते हँसते लगे रोने हम
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Shubham Rai 'shubh'
मौन लोगों देख कर हैरत नहीं होती
या तुम्हारी भावना आहत नहीं होती

क़ुछ कड़े क़ानून जो इस देश में होते
बेटियों की फिर यहाँ दुर्गत नहीं होती
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Shubham Rai 'shubh'
जैसे क़िस्मत आज़माना होता है
उस तरह अब दिल लगाना होता है

ये खुले गेसू नशीली आँखें बस
और क्या दिल हार जाना होता है
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Shubham Rai 'shubh'
मोहब्बत से निकलना जो कभी तो देखना तुम
किताब-ए-ज़ीस्त के पन्नों में लिक्खा क्या गया था
Shubham Rai 'shubh'
पैर रख कर काँधे पर जिस के चढ़ना सीखा है
तुम उसे समझा रहे सीढ़ी कैसी होती है
Shubham Rai 'shubh'
बदलते वक़्त का हिस्सा हूँ मैं
कि स्क्वायर फ़ुट हो तुम बिस्वा हूँ मैं
Shubham Rai 'shubh'
चाहत इतनी सी तुझे ख़ुश देखूँ
है दुआ मेरी चाहत पूरी हो
Shubham Rai 'shubh'
अना पर बात आए लहरों को भी मोड़ दूँगा
कटे गर्दन भले तेरी अकड़ मैं तोड़ दूँगा

रहूँगा शान से चाहे खड़ी हो मौत सम्मुख
झुकाऊँगा न सर अपना ये साँसें छोड़ दूँगा
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Shubham Rai 'shubh'
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