Aalok Shrivastav

Aalok Shrivastav

@aalok-shrivastav

Aalok Shrivastav shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aalok Shrivastav's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
हम ने दुनिया की तरफ़ देखा नहीं
तुम को चाहा और कुछ सोचा नहीं
Aalok Shrivastav
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घर के बुज़ुर्ग लोगों की आँखें क्या बुझ गईं
अब रौशनी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा

आए थे मीर ख़्वाब में कल डाँट कर गए
क्या शा'इरी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
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Aalok Shrivastav
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बाज़ार जा के ख़ुद का कभी दाम पूछना
तुम जैसे हर दुकान में सामान हैं बहुत

आवाज़ बर्तनों की घर में दबी रहे
बाहर जो सुनने वाले हैं, शैतान हैं बहुत
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Aalok Shrivastav
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हम उसे आँखों की दहलीज़ न चढ़ने देते
नींद आती न अगर ख़्वाब तुम्हारे ले कर

एक दिन उस ने मुझे पाक नज़र से चूमा
उम्र भर चलना पड़ा मुझ को सहारे ले कर
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Aalok Shrivastav
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दिलों की बातें दिलों के अंदर ज़रा सी ज़िद से दबी हुई हैं
वो सुनना चाहें, ज़बाँ से सब कुछ मैं करना चाहूँ नज़र से बतियां

ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है
सुलगती सांसें, तरसती आँखें, मचलती रूहें, धड़कती छतियां
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Aalok Shrivastav
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मुझे मालूम है माँ की दुआएँ साथ चलती हैं
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैं ने देखा है
Aalok Shrivastav
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अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है
अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी

कभी बड़ा सा हाथ ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन
मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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घर में झीने रिश्ते मैं ने लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
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जिस का तारा था वो आँखें सो गई हैं
अब कहाँ करता है मुझ पर नाज़ कोई
Aalok Shrivastav
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ग़नीमत है नगर वालों लुटेरों से लुटे हो तुम
हमें तो गांव में अक्सर, दरोगा लूट जाता है
Aalok Shrivastav
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ज़रा पाने की चाहत में बहुत कुछ छूट जाता है
नदी का साथ देता हूँ समुंदर रूठ जाता है
Aalok Shrivastav
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अब तो ख़ुद अपने ख़ून ने भी साफ़ कह दिया
मैं आप का रहूॅंगा मगर उम्र भर नहीं
Aalok Shrivastav
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पिछले बरस भी हम ने कलाई सजाई थी
राखी के धागे आज भी कच्चे नहीं पड़े
Aalok Shrivastav
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नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है
सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
Aalok Shrivastav
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मैं अपनी दुनिया का ऐसा सूरज हूँ
जिस सूरज का गहना मुश्किल होता है
Aalok Shrivastav
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तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक
मेरी तो निगाहें हैं सूरज के ठिकानों तक
Aalok Shrivastav
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तुम्हारे पास आते हैं तो साँसें भीग जाती हैं
मोहब्बत इतनी मिलती है कि आँखें भीग जाती हैं

तबस्सुम इत्र जैसा है हँसी बरसात जैसी है
वो जब भी बात करती है तो बातें भीग जाती हैं
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Aalok Shrivastav
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आ ही गए हैं ख़्वाब तो फिर जाएँगे कहाँ
आँखों से आगे उन की कोई रहगुज़र नहीं
Aalok Shrivastav
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यही तो एक तमन्ना है इस मुसाफ़िर की
जो तुम नहीं तो सफ़र में तुम्हारा प्यार चले
Aalok Shrivastav
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ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं
Aalok Shrivastav
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