Parwez Akhtar

Parwez Akhtar

@akhtar-parwez

Parwez Akhtar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Parwez Akhtar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
मिला है क़ैस मुझे दश्त में तो पूछता है
तुझे भी दश्त में लाई है जुस्तजू तेरी?
Parwez Akhtar
अजब सी कारीगरी है तुम्हारे होंठों में
तो फिर हमें अपने लबों से संवारा करो
Parwez Akhtar
देखिए दोस्ती मेरी अच्छी नहीं
आप का सब कुछ तबाह हो जाएगा
Parwez Akhtar
ग़नीमत है की तेरे ग़म ने बख़्शा
वगरना मैं तो ज़िंदा ही कहाँ था
Parwez Akhtar
हाँ तेरे हुस्न को रुस्वा किया है
मैं तेरे हुस्न से उकता गया हूँ
Parwez Akhtar
मैं अपनी दु'आओं में असर ढूँडता रहा
उस
में छुपा जो ज़र था वो ज़र ढूँडता रहा

नाकामियों में मैं ने गुज़ारी है ज़िन्दगी
नाकामियों में अपना हुनर ढूँडता रहा
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Parwez Akhtar
दर्द को गिनता रहता हूँ शब ओ रोज़
मुद्दतों बा'द कोई काम मिला है मुझ को
Parwez Akhtar
हम पे लानत है कि तेरे पहलू में बैठें हों अगर
तुझ को देखें भी नहीं और तुझ को सोचें भी नहीं
Parwez Akhtar
मैं जिस ज़मीं पे अपने आँसुओं को दफ़्न करता था
सुना है उसी ज़मीन पर अब के बहार आएगी
Parwez Akhtar
दिल अब उदास भी नहीं न बे-क़रार है
बस ख़ाक में ही मिलने का इंतिज़ार है

जिस के सहारे हयात ए ज़िन्दगी का लुत्फ था
वो ग़म भी आजकल किसी पे उधार है
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Parwez Akhtar
मैं उस के पास में बैठूँ तो इस का सबब पूछता है
क्या मैं अपने आप पे एहसान कर नहीं सकता ?
Parwez Akhtar
वो शम्अ' के मानिंद हर वक़्त जलती रहती थी
फिर मैं भी अपनी ज़ात का परवाना हो गया
Parwez Akhtar
मुझे तो बस सफ़र से इश्क़ है
मंज़िलें तो मुसाफ़िरों की होती है
Parwez Akhtar
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एक बार बसा लें अगर कुछ अपने दिल में
फिर दर्द हो या तू हो निकलने नहीं देंगे
Parwez Akhtar
अपने किरदार को कहानी में पिरोलो वरना
ये जो किरदार है कहानी से रूठ जाएगा
Parwez Akhtar
इस का चारा क्या है तू ही बता ऐ साक़ी
जाम जब मुँह से लगता हूँ तो याद आती है
Parwez Akhtar
सच बोलने दे ज़ालिम न कर ऐसा सलूक मुझ सेे
मेरे ख़्वाब सब हैं टूटे कहीं दिल टूट न जाए
Parwez Akhtar
तू ने इतनी भी चोटें नहीं खाई हैं 'अख़्तर'
दिल किसी और से तू भी तो लगा सकता है
Parwez Akhtar
हर एक बात पे तेरा रूठ जाना
ये इशारा है कि तू मेरा है
Parwez Akhtar
मैं चाहता हूँ वो मुझ से दूर रहे और वो
नासमझ है फिर दिल लगा के मानेगी
Parwez Akhtar

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