Akhtar Shirani

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Akhtar Shirani shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Akhtar Shirani's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
काम आ सकीं न अपनी वफ़ाएँ तो क्या करें
उस बे-वफ़ा को भूल न जाएँ तो क्या करें
Akhtar Shirani
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ज़िंदगी कितनी मसर्रत से गुज़रती या रब
ऐश की तरह अगर ग़म भी गवारा होता
Akhtar Shirani
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मुझे है ए'तिबार-ए-वादा लेकिन
तुम्हें ख़ुद ए'तिबार आए न आए
Akhtar Shirani
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मुबारक मुबारक नया साल आया
ख़ुशी का समाँ सारी दुनिया पे छाया
Akhtar Shirani
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पलट सी गई है ज़माने की काया
नया साल आया नया साल आया
Akhtar Shirani
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रात भर उन का तसव्वुर दिल को तड़पाता रहा
एक नक़्शा सामने आता रहा जाता रहा
Akhtar Shirani
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मिट चले मेरी उमीदों की तरह हर्फ़ मगर
आज तक तेरे ख़तों से तिरी ख़ुशबू न गई
Akhtar Shirani
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मुद्दतें हो गईं बिछड़े हुए तुम से लेकिन
आज तक दिल से मिरे याद तुम्हारी न गई
Akhtar Shirani
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अब जी में है कि उन को भुला कर ही देख लें
वो बार बार याद जो आएँ तो क्या करें
Akhtar Shirani
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अब तो मिलिए बस लड़ाई हो चुकी
अब तो चलिए प्यार की बातें करें
Akhtar Shirani
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याद आओ मुझे लिल्लाह न तुम याद करो
मेरी और अपनी जवानी को न बर्बाद करो
Akhtar Shirani
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माना कि सब के सामने मिलने से है हिजाब
लेकिन वो ख़्वाब में भी न आएँ तो क्या करें
Akhtar Shirani
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थक गए हम करते करते इंतिज़ार
इक क़यामत उन का आना हो गया
Akhtar Shirani
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ख़फ़ा हैं फिर भी आ कर छेड़ जाते हैं तसव्वुर में
हमारे हाल पर कुछ मेहरबानी अब भी होती है
Akhtar Shirani
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कुछ इस तरह से याद आते रहे हो
कि अब भूल जाने को जी चाहता है
Akhtar Shirani
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उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ
किस दर्जा ना-उमीद हैं परवरदिगार से
Akhtar Shirani
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कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता
तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता
Akhtar Shirani
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दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी
'अख़्तर' वो बे-ख़ुदी के ज़माने किधर गए
Akhtar Shirani
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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या
Akhtar Shirani
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उन रस भरी आँखों में हया खेल रही है
दो ज़हर के प्यालों में क़ज़ा खेल रही है
Akhtar Shirani
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