Ankit Yadav

Ankit Yadav

@akyadav1786

ankit yadav shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in ankit yadav's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
बड़े अदब से बड़ी शराफ़त से देखता हूँ
मैं उस की जानिब बड़ी तबीअत से देखता हूँ

वो जाते जाते मुझे पलट कर के देखता तो
ये देख लेता कि मैं मोहब्बत से देखता हूँ
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Ankit Yadav
दरअस्ल तो हम मोहब्बतों में दरख़्त से हैं
जहाँ खड़े थे वहीं खड़े हैं खड़े रहेंगे
Ankit Yadav
पाँच फ़ुट की लड़कियों से दूर रहना था मगर
दिल गया तो पाँच फ़ुट की एक लड़की पर गया
Ankit Yadav
वो अक्सर एहतियातन ही नहीं मिलता किसी से
मुलाक़ातें बताती हैं कि घाइल लिस्ट में था

महीनों बा'द वो आँखें वो नंबर याद आया
वो इक चेहरा न जाने कब से डायल लिस्ट में था
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Ankit Yadav
अब इस कमरे में सब बिखरा हुआ है
यहाँ पर कोई अलमारी नहीं है

वो इतनी तेज़ लड़की है कि उस को
समझ लेना समझदारी नहीं है
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Ankit Yadav
मैं ने इन नीली आँखों के नक़्श-अयाँ तक जाना है
या'नी इक गहरे दरिया के पार निशाँ तक जाना है

उस के दिल की एक गली में घूम रहा हूँ उस के साथ
और वो मुझ सेे पूछ रही है और कहाँ तक जाना है
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Ankit Yadav
अभी कुछ लोग बाक़ी हैं बग़ावत के लिए या'नी
मोहब्बत की गली में वो मक़ाम आया नहीं अब तक
Ankit Yadav
शहर-ए-मशहूर जा रहा है कोई
हो के मजबूर जा रहा है कोई

खिड़कियाँ पास आती जा रही हैं
या'नी अब दूर जा रहा है कोई
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Ankit Yadav
वो जिस लिहाज़ से दुश्मन समझ रही है हमें
हम उस लिहाज़ से तो वुल्वरीन होते हैं
Ankit Yadav
तुम ने देखी हैं कभी ग़ौर से आँखें उस की
तय किया है कभी इक बार में मीलों का सफ़र

चाँदनी रात में रखते नहीं लहरों का भरम
चाँदनी रात में करते नहीं झीलों का सफ़र
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Ankit Yadav
होता है आख़िरी जज़्बे की तरह पहला इश्क़
आख़िरी इश्क़ तो पहले की तरह होता है
Ankit Yadav
आदमी जैसी किसी शय से मुलाक़ात हुई
कल मेरी ख़ुद से बड़ी देर तलक बात हुई

दिन यूँँ ही क़ैद रहा उस की ज़री ज़ुल्फ़ों में
उस ने जब खोल दी ज़ुल्फ़ें तो कहीं रात हुई
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Ankit Yadav
मोहब्बत में महारत है हमें बस की नहीं है
हसीं चेहरा खुली ज़ुल्फ़ें लटें बस की नहीं है

अभी करनी है तो कर ले मोहब्बत कम या ज़्यादा
मुझे मालूम है तू बा'द में बस की नहीं है
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Ankit Yadav
उसे छोड़ो हमारे हाथ का बिगड़ा हुआ है वो
हमारे हाथ के बिगड़े हुए बर्तन नहीं बनते
Ankit Yadav
उसे ये ग़म है कि मेरी आँखें उबर गई हैं अब उस के ग़म से
मुझे ये दुख है कि उस का चेहरा अब आइने से उतर गया है
Ankit Yadav
उस के पहलू में रात होती है
बात करने पे बात होती है

वैसे टाइम का कुछ पता तो नहीं
हाँ मगर पौने सात होती है
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Ankit Yadav
इक उम्र गुज़ारी है मैं ने उन आँखों के तह-ख़ानों में
उन आँखों के आगे शायद झीलें होंगी दरिया होगा
Ankit Yadav
दिमाग है कि बदन ही बदन समझता है
अजीब दिल है मोहब्बत पकड़ के बैठा है
Ankit Yadav
एक मुश्किल सवाल और सही
उस की आँखों से क्या समझते हो
Ankit Yadav
पहले उस का चेहरा देखो और फिर उस की आँखें देखो
चेहरा तो घाइल करता है आँखें पागल कर देती हैं
Ankit Yadav

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