Aman Mishra 'Anant'

Aman Mishra 'Anant'

@amananant.writes

Aman Mishra 'Anant' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aman Mishra 'Anant''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
अपने हाथों को बना पतवार जाते
राम का ले नाम दरिया पार जाते

हम ने झूठी जीत से ढाढस बढ़ाया
मान लेते हार तो फिर हार जाते
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Aman Mishra 'Anant'
प्रेम के आसक्त करते वेदना का जाप है
हम अभागों पर लगा पीड़ा का कोई श्राप है

इस का कोई दुख नहीं है रूष्ट सारे लोग हैं
किंतू क्रोधित सब सेे ज़्यादा हम सेे अपना आप है
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Aman Mishra 'Anant'
अपनी दुनिया में खोई रहती है
मेरे शाने पे सोई रहती है
Aman Mishra 'Anant'
उलझा कर जिस को ये दुनिया रखती है
सादा सी प्यारी सी अच्छी लड़की है
Aman Mishra 'Anant'
बबूलों में किसी उलझे बदन सी होने लगती है
जो तेरे बिन कोई छू ले चुभन सी होने लगती है

बिना तन्हाई के इक पल रहा जाता नहीं मुझ सेे
किसी से बात कर लूँ तो घुटन सी होने लगती है
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Aman Mishra 'Anant'
किस लिए नाराज़ तुम हो बे-वफ़ा
दिलजलों का नाज़ तुम हो बे-वफ़ा

मीर जाफर एक था बंगाल में
एक धोखेबाज़ तुम हो बे-वफ़ा
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Aman Mishra 'Anant'
शौक़ घिनौना है जी उस का
प्रेम खिलौना है जी उस का

फिर इक बारी मरना होगा
कल को गौना है जी उस का
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Aman Mishra 'Anant'
प्रेम की बात जब भी होती है
दिल में इक बे-दिली सी होती है

तुम जो सो पाओ तो बता देना
चैन की नींद कैसी होती है
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Aman Mishra 'Anant'
ये जो ढलती हुई जवानी है
हर नए साल की कहानी है

देख आँखें मेरी बता मुझ को
इस
में किस नाम की निशानी है
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Aman Mishra 'Anant'
हूँ यूँँ टूटा नहीं था जानता मैं
मुझे मेरी हँसी से ख़ुश लगा मैं

उसे मिलना तो था बेबाक होकर
वो आई सामने तो बिछ गया मैं
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Aman Mishra 'Anant'
जो अंदर में है जारी जंग हूँ मैं
बताऊँ क्या कि कितना तंग हूँ मैं

वही तू जो पहनती ही नहीं है
उसी बुरक़े का काला रंग हूँ मैं
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Aman Mishra 'Anant'
होते थे मेरे भी अपने पास मेरे
अब तो है कुछ तन्हा रस्ते पास मेरे

वो तो हर दिन अपना रंग बदलती है
दो जोड़ी कपड़े हैं गिनके पास मेरे
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Aman Mishra 'Anant'
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पूजित तुलसी हर दिन बतलाती थी
माँ सूरज से पहले उठ जाती थी

मुझ को वैसे पढ़नी है ये दुनिया
जैसे नानी मानस पढ़वाती थी
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Aman Mishra 'Anant'
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रोज़ रोने के बहाने ढूँढ़ते है
बेबसी से अपने रिश्ते ख़ून के है

देख लेंगे फिर ग़लत क्या है सही क्या
आ अभी इक दूसरे को चूमते है
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Aman Mishra 'Anant'
धाम लिख दूँ तेरे दिल पे
श्याम लिख दूँ तेरे दिल पे

दिल तेरा पत्थर का है तो
राम लिख दूँ तेरे दिल पे
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Aman Mishra 'Anant'
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ये दुनिया ही मुझे क्या क्या बुलाती है
कि माँ तो आज भी लल्ला बुलाती है
Aman Mishra 'Anant'
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दुख बहुत है दोस्त कम है
इस लिए बस आँख नम है
Aman Mishra 'Anant'
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हदें सब तोड़ भागूँगा किसी दिन
नया रस्ता बना लूँगा किसी दिन

मैं या तो मार दूँगा तुम सभी को
या ख़ुद को मार डालूँगा किसी दिन
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Aman Mishra 'Anant'
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जब उस के ठुकराए आते है
दुनिया से उकताए आते है

पहले तुम आती थी सपनों में
अब सपनों में साए आते है
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Aman Mishra 'Anant'
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सोचो कितना अच्छा हो सकता है
ये सब पहले जैसा हो सकता है

बुरखे वाली वो चंदन वाला मैं
साहब क्या ये रिश्ता हो सकता है
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Aman Mishra 'Anant'
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