Arman Habib

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@arman_habib

Arman Habib shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Arman Habib's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
पहले जी भर रोता है ग़मगीन होता है
तब कहीं ये आसमाँ रंगीन होता है
Arman Habib
जिस ने जोड़ा नहीं अली से दिल
दिल से रक्खूँ मैं जोड़ कर कैसे

इल्म हासिल करूँ मैं दुनिया में
ख़ुद अली को ही छोड़ कर कैसे
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Arman Habib
नहीं अब कुछ भी कहना पाप पर
खड़ा हूँ ज़िंदगी की ताप पर

मुझे क्यूँ देखती हैं आप यूँ
तरस आता है मुझ को आप पर
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Arman Habib
तेरी क़समें तेरे वा'दे तेरी बाहें तेरी यादें
सभी मिल कर बताते हैं तेरा किरदार झूठा है
Arman Habib
सुकूँ घाटों पे ऐसा है कि फ़ारस भूल जाऊँ मैं
मगर मुमकिन नहीं है ये बनारस भूल जाऊँ मैं
Arman Habib
बदल जाते हैं चेहरे भी बदल जाती हैं तक़दीरें
यहाँ कुछ भी हमेशा एक ही जैसा नहीं रहता

कभी हालात ऐसे भी बना देते हैं इन्साँ को
कि ख़ुद अपने ही घर में कोई भी अपना नहीं रहता
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Arman Habib
ग़म मनाने मैं तिरे दर पे नहीं आऊँगा
अपने अंदर ही कहीं चुपके से मर जाऊँगा
Arman Habib
ये दुनिया चाहती है हर किसी से फ़ायदा अपना
बिना मतलब किसी पर यूँ इनायत कौन करता है
Arman Habib
रख दिए होंठ होंठों पे तुम ने
देख लो अब शुगर बढ़ गया है
Arman Habib
कुछ इस लिए ख़ामोशी को पहना हूँ मैं 'अरमान'
दुश्मन के वफ़ादार भी रहते हैं मेरे साथ
Arman Habib
अव्वल-अव्वल उस का हँसता चेहरा देखा जा सकता है
इक ही लम्हे में फिर मौसम अच्छा देखा जा सकता है

दिलकश चेहरा मय-कश आँखें बिखरी ज़ुल्फ़ों से तुम निकलो
देखो तो फिर दो आँखों से दुनिया देखा जा सकता है
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Arman Habib
मियाँ मुझ को सवारी देखनी है
पिया की मेहरबानी देखनी है

अभी से आँख भीगी जा रही है
अभी तो उस की शादी देखनी है
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Arman Habib
दुल्हन की ख़ुशबू से सारा आँगन सजा रहेगा
बाहर वो पत्थर सा कोई आशिक़ पड़ा रहेगा
Arman Habib
मैं पर्वत हूँ मगर मैं एक वादी छोड़ आया हूँ
मुहब्बत में तिरे मैं शाह-ज़ादी छोड़ आया हूँ
Arman Habib
ख़ुद से कर ली है दुश्मनी हम ने
तोड़ कर के ये आशिक़ी हम ने

हम ने सिगरेट तो नहीं फूँकी
फूँक डाली ये ज़िन्दगी हम ने
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Arman Habib
मस्जिद के पास जबकि मकाँ उस का है मगर
मैं हूँ कि अब तलक भी नमाज़ी न बन सका
Arman Habib
हम अपनी छत पर इबादतों में जो सर झुकाएँ गुनाह कैसा
हम अपने हक़ के लिए लड़ेंगे तिरी ये जुरअत नहीं चलेगी
Arman Habib
क़तरा-क़तरा वक़्त सब पी जाएगा
ज़िंदगानी इक पिघलती बर्फ़ है
Arman Habib
ग़रीबी चीख़ती फिरती है हर इक मोड़ पर लेकिन
यहाँ हर कान बहरा है यहाँ हर दिल ही पत्थर है
Arman Habib
तिरी हर बात वादे की तिरा दावा भी खोटा है
तेरा भेजा हुआ ख़त भी मुझे मालूम झूठा है

मेरा हर लफ़्ज़ तेरा था मेरी हर साँस थी तेरी
करूँँ क्या ज़िक्र तेरा मैं तेरी ख़ूँ में ही धोका है
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Arman Habib

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