Bhuwan Singh

Bhuwan Singh

@bhuwansingh

Bhuwan Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Bhuwan Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
इजाज़त तो नहीं हम को मगर देखा है हम ने
अधूरे इश्क़ का पूरा असर देखा है हम ने

इन आँखों की उदासी का सबब है उस की आँखें
उसे क्या इल्म उस को किस क़दर देखा है हम ने
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Bhuwan Singh
देने को दे सकूँगा फ़क़त अपनी जान मैं
अब देते देते थक चुका हूँ इम्तिहान मैं

रक्खा नहीं है कुछ भी यहाँ पर मेरे लिए
सो जा रहा हूँ छोड़ के अब ये जहान मैं
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Bhuwan Singh
मैं आज कर रहा हूँ ये एलान साहिबा
दरबार-ए-दिल की आप ही हो शान साहिबा

मैं आप के इलावा किसी और का नहीं
इतना हुआ न करिए परेशान साहिबा
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Bhuwan Singh
बना है सिगरटों का ऐसा आशियाँ दिल में
कि धड़कनों से ज़ियादा है अब धुआँ दिल में

तमाम उम्र रहूँगा मैं इस के अंदर क़ैद
तमाम उम्र रहेगा तिरा मकाँ दिल में
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Bhuwan Singh
कह दूँ तो छोड़ आए वो गुलशन मेरे लिए
इतना करेगा कौन ख़ुसूसन मेरे लिए

हुस्न-ए-गुल-ए-चमन पे ठहर जाए आफ़ताब
साया-ए-गुल ही तो है नशेमन मेरे लिए
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Bhuwan Singh
भले ही ग़म मिरे हिस्से में छोड़ कर जाना
मगर तू कुछ तिरे बदले में छोड़ कर जाना

सफ़र तू साथ में क़ामिल करें तो लानत है
तिरा तो बनता है आधे में छोड़ कर जाना
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Bhuwan Singh
वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी
मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी

मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था
वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी
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Bhuwan Singh
तन्हा ही हम ने वक़्त गुज़ारा अभी तलक
कोई हुआ नहीं है हमारा अभी तलक

होता है काफ़ी वो जो समझदार के लिए
हम को मिला नहीं वो इशारा अभी तलक
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Bhuwan Singh
होगा दुख कल उसे मंज़र के बदल जाने से
आज जो ख़ुश है दिसंबर के बदल जाने से

रोज़-ओ-शब रोते हैं हम कल भी हमें रोना है
हम को क्या फ़र्क कैलेंडर के बदल जाने से
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Bhuwan Singh
तू ने मेरे लिए यूँॅं तो क्या क्या नहीं किया
पर मुझ को इस तरह कभी तन्हा नहीं किया

मैं ख़ुश था इस
में भी कि हम इक दुनिया में हैं दोस्त
बस तू ने दुनिया छोड़ के अच्छा नहीं किया
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Bhuwan Singh
बोलो तो अभी ख़त्म करूँँ अपनी कहानी
इस के लिए इक रस्सी फिर इक पंखा लगेगा
Bhuwan Singh
बारहा उस की गली और वो दर दिखता था
पर जिसे देखना था एक नज़र दिखता था

क्या करूँ अब कि खड़ी कर गया दीवार रक़ीब
वरना घर से मेरे महबूब का घर दिखता था
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Bhuwan Singh
रूह को अंदर से पहले ख़ूब झिंझोड़ा गया
फिर मिरा हर ख़्वाब मेरे सामने तोड़ा गया

हश्र कुछ ऐसा हुआ है मेरे इस किरदार का
क़िस्तों में तोड़ा गया फिर रिश्तों में छोड़ा गया
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Bhuwan Singh
सुधरने के लिए इक और साल लेना है
ये इश्क़ दिल से मगर अब निकाल लेना है

मेरे हो तुम यही बस सोच कर जिया अब तक
अब आगे ऐसा ही इक वहम पाल लेना है
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Bhuwan Singh
कोई तरीक़ा ही नहीं इस को बचाने के लिए
दिल तो बना ही है मियाँ बस चोट खाने के लिए

उम्मीद मत रखना कि अब वादे निभाएगा कोई
हर शख़्स वादे करता है अब तोड़ जाने के लिए
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Bhuwan Singh
मुझ को वो रात ख़ास लगती है
नींद जब तेरे पास लगती है

सिर्फ़ माथे पे बोसा मत किया कर
इन लबों को भी प्यास लगती है
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Bhuwan Singh
मेरी इन आँखों से हर अश्क उतारने के लिए
बस इक ही ग़म लगा 'उम्रें गुज़ारने के लिए

कई लिबास मेरे पास हैं सँवरने को
मगर मिला नहीं कुछ मन सँवारने के लिए
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Bhuwan Singh
कोई सज़ा सुना ही न पाए मेरे लिए
कानून ऐसा कोई बनाए मेरे लिए
Bhuwan Singh
इस कहानी को अब अंजाम दिया जाएगा
मेरे किरदार को आराम दिया जाएगा

एक दूजे से कभी होगी नहीं शादी पर
मेरी बेटी को तिरा नाम दिया जाएगा
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Bhuwan Singh
जितना सोचता हूँ उस को उतनी खलती रहती है
इक ही बात मेरे ज़ेहन में यूँँ चलती रहती है

इक मैं हूँ कि जिस का दुनिया में बस इक ही यार है
इक वो है जो अपने यार ही बदलती रहती है
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Bhuwan Singh

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