divya 'sabaa'

divya 'sabaa'

@divya.behindthelense

divya 'sabaa' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in divya 'sabaa''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

35

Content

89

Likes

310

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
कहाँ के सजदा-ए-क़िरअत कहाँ का ध्यान और पूजा
इबादत-गाह भी अब हम बराए शर बनाते हैं
divya 'sabaa'
हम तो मेमार हैं कर लेंगे नशेमन तामीर
हाँ मगर ठहरो ये तूफ़ान गुज़र जाने दो
divya 'sabaa'
राह में हर पल भटक जाने का डर बाक़ी रहे
या'नी मंजिल पर पहुँच कर भी सफ़र बाक़ी रहे
divya 'sabaa'
सुना है 'मीर' को पढ़ने लगा है वो जब से
बहुत उदास सा रहता है बोलता भी नहीं
divya 'sabaa'
वो अक्स जिस की एक भी मुमकिन नहीं मिसाल
जो बन के मेरे ज़ेहन में पैकर ठहर गया
divya 'sabaa'
हमारा क़त्ल पहेली है एक इक के लिए
किसी को क्या है ख़बर हम ने ख़ुद-कुशी की है
divya 'sabaa'
यूँँ तो तमाम रंग थे तस्वीर में मिरी
लेकिन सियाह रंग ने बेहतर किया मुझे
divya 'sabaa'
ये मिरी ग़ज़ल का मिज़ाज है कि वो क़ाफ़िए के ख़िलाफ़ है
कभी रक़्स करती है अक्स पर अभी आईने के ख़िलाफ़ है
divya 'sabaa'
उदासी के घने साए मिटाकर ही वो मानेंगे
जो तन्हा अपने कमरे में ठहाकों को लगाते हैं
divya 'sabaa'
आँखें तरस रही हैं जज़्बे पिघल रहे हैं
अनफ़ास को हमारे लम्हे निगल रहे हैं

जज़्बात के शजर पर बरसात है ग़मों की
एहसास के सफ़र में हम रुख़ बदल रहे हैं
Read Full
divya 'sabaa'
अगर मासूमियत से काम लेना चाहते हो
पढ़ो छू कर गुलों को तुम कि उन पर क्या लिखा है
divya 'sabaa'
मैं हूँ और कुंज-ए-क़फ़स है मिरी राहत के लिए
सभी सामान बहम है मिरी इशरत के लिए
divya 'sabaa'
हयात-ओ-मौत में कुछ फ़ासिला यक़ीनी है
मगर चलें तो सफ़र ख़त्म और शुमार न हो
divya 'sabaa'
मरज़ अजीब था अपना अजब मसीहा थे
दवा ने मुझ पे दवा पर शिफ़ा ने तंज़ किया
divya 'sabaa'
दयार-ए-हिज्र की तन्हा उदास रातों में
रवाँ-दवाँ तिरी आवाज़-ए-पा अभी तक है
divya 'sabaa'
आशिक़ों का यही अफ़साना है और कुछ भी नहीं
कुछ न कर पाएँ तो वो आह-ओ-फ़ुग़ाँ तक पहुँचे
divya 'sabaa'
चंद मख़्सूस दरख़्तों से मुहब्बत का जुनून
कुछ परिंदों को कहीं का नहीं रहने देता
divya 'sabaa'
कुछ ख़तरा नहीं उन को समुंदर की तरफ़ से
हुशयार अब आईने हैं पत्थर की तरफ़ से
divya 'sabaa'
ताज़ा फूलों से नहीं घर की शिनाख़्त
फूल मुरझाएँ तो अपना घर लगे
divya 'sabaa'
हम ने ग़ज़ल में उस के सिवा सब सेे बात की
अब इस को आप कुछ भी कहें इस्तिलाह में
divya 'sabaa'

LOAD MORE