Hrishita Singh

Hrishita Singh

@hrishitasingh631

Hrishita Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Hrishita Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
रफ़ाक़त है दिल जू न कर
जो सब करते हैं तू न कर
Hrishita Singh
अगर इश्क़ हो मुस्तक़िल हो वो फिर
ये इम्कान बेज़ा ख़याली न हो
Hrishita Singh
अपनी ज़िद में हारे हैं तुम ने
अपने सब सेे ज़्यादा प्यारे लोग
Hrishita Singh
उस का ग़म मुझ पर तारी है
अब तक हस्ती ये जारी है

आमद हो जानी है उस की
जिस के आने तैयारी है
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Hrishita Singh
जाने यहाँ मिलते हैं कैसे कैसे लोग
कुछ अलहदा कुछ हम सेे मिलते जुलते लोग
Hrishita Singh
आधी नींद के मारे लोग
कैसे हैं ये बेचारे लोग
Hrishita Singh
तुम ने मुड़कर भी देखा नहीं था हमें
देखो अब किस तरह हम हैं बिखरे हुए
Hrishita Singh
वो जितना हसीन मुस्कुराते हैं
शायद कोई हादसा छुपाते हैं
Hrishita Singh
सच जान ले न उन का कोई ऐसे
सब लोग मुँह छुपाए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
अब दिल-लगी हुई है ऐसी सब सेे
हर शख़्स आज़माए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
हम उस का ग़म छुपाए फिर रहे हैं
जिस से ये दिल लगाए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
तुम न आए फ़ज़ा भी ये रूखी सी थी
तुम जो आओ तो गीतों को भी सुर मिले

जब निहारा था तुम ने तो सँवरी थी मैं
फेरी जब से नज़र तो उजड़ने लगे
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Hrishita Singh
इक जुस्तजू दीदार के तेरे सिवा कुछ भी नहीं
ऐसा नहीं उन रास्तों पर अब रुका मैं ही नहीं

ज़द में किसी दीवार के उलझी रही हो रौशनी
कमरे में मेरे रौशनी भी अब बसर करती नहीं
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Hrishita Singh
वो अर्से के बा'द फिर मिले मुझ को यूँँ
सफ़्हे में गुलाब जैसे पाया जाए
Hrishita Singh
जिसे तुम समझते हो मंज़िल
वो बस रास्ता है किसी का
Hrishita Singh
कोई लफ़्ज़ इतना भी ख़ाली न हो
कोई नज़्म इतनी सवाली न हो

थे उस के भी चेहरे पे चेहरे कई
कोई शख़्स इतना भी जाली न हो
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Hrishita Singh
मेरी दुनिया जिस
में सिमट जाती थी
तो अब उस के कानों में बाली न हो
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Hrishita Singh
ये उलझनें मुझे ही खा रही हैं
अब ख़ुद को ही सताए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
बीनाई आँखों की भी जा चुकी है
बस सपने भी सजाए फिर रहे हैं

बातों में अपनी रखते थे उसे हम
बातों में जिस की आए फिर रहे हैं
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Hrishita Singh
साथ मेरे तो वो चल रहा
पर वो मेरा हम सफ़र नहीं
Hrishita Singh

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