Shivam Mishra

Shivam Mishra

@iamshivam

Shivam Mishra 'Mustaqil' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shivam Mishra 'Mustaqil''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
ख़ास कुछ भी नहीं अब मेरे पास है
चीख़ने का ख़मोशी में एहसास है
Shivam Mishra
सब को हैरत रही उन के दीदार से
हम को ज़ख़्मी किया अपने किरदार से


हाल पूछो तो है ख़ैरियत सब यहाँ

हैं मगर याद में उन के बीमार से
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Shivam Mishra
वक़्त भी कहाँ रुका किसी के ए'तिराज़ से
जो अज़ीज़ थे बदल गए बड़े लिहाज़ से
Shivam Mishra
रह के ख़ुश अब तो करना है ग़म का मफ़र
काटना है यूँँ ही ज़िंदगी का सफ़र
Shivam Mishra
हिज्र की रात आई तो हम डर गए
शे'र कहते हुए मयकशी कर गए
Shivam Mishra
नसीहत तो क़िस्मत को देनी है अब
उसे शक है मेहनत पे शायद मेरी
Shivam Mishra
सिवा उन के कोई भी रास नइँ आया
कोई अब तक तभी तो पास नइँ आया
Shivam Mishra
नींद आती है कम रात में अब मुझे
लग रहा है कि मंज़िल क़रीब आ गई
Shivam Mishra
चाल पे ख़ुद की उन को है नाज़िश हुई
देख गर्दिश में मुझ को जो साज़िश हुई
Shivam Mishra
मिल के ग़ैरों से मुझ को जलाता रहा
जिस को अक्सर मैं अपना बताता रहा
Shivam Mishra
मेरी आँखों में तुम रह गए इस क़दर
रात सोया तो ख़्वाबों में आए नज़र
Shivam Mishra
ख़बर ये शहर को भी थी कि मिट्टी का है घर मेरा
यूँँ ही बारिश नहीं माँगी ज़माने ने दु'आओं में
Shivam Mishra
हैं दरारें बहुत दर्द की मुझ
में भी
पर बुरादा ख़मोशी के डाले हूँ मैं
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Shivam Mishra
पास हो के भी कितना रहे दूर हैं
कुछ किया भी नहीं फिर भी मशहूर हैं
Shivam Mishra
बदल तक़दीर जाती है वही इक वक़्त आने पर
सँभल जाता है कोई जब कभी ठोकर भी खाने पर
Shivam Mishra
वो जो इल्ज़ाम हम पर ही लगा के फिर ख़फ़ा हैं अब
हमें कह बद-चलन ख़ुद ही हुए वो बे-वफ़ा हैं अब
Shivam Mishra
लब थे ख़ामोश नज़रों ने ही बात की
हम ने यूँँ आख़िरी वो मुलाक़ात की

सिर्फ़ पलकें ही थी भीगती रह गईं
जाने कैसे ख़ुदा ने वो बरसात की
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Shivam Mishra
तेरी नज़रें जिसे देख लें इक दफ़ा
फिर लगे नइँ दुआ और कोई दवा
Shivam Mishra
अब भरोसा किसी का न करना 'शिवम्'
दर्द होता बहुत जब भी टूटे भरम
Shivam Mishra
जो धोखा मिल गया हो तो मोहब्बत तीर लगती है
मिली जो नइंँ वफ़ा हम को तो ये तक़दीर लगती है

कि रानी है किसी की वो कहानी थी किसी की वो
मैं रांझा बन नहीं पाया मगर वो हीर लगती है
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Shivam Mishra

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