Irshad 'Arsh'

Irshad 'Arsh'

@irshads141

Irshad 'Arsh' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Irshad 'Arsh''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

7

Content

38

Likes

123

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
कुछ न करने के सौ बहाने हैं
करना चाहो तो क्या नहीं होता
Irshad 'Arsh'
ज़िंदगी पुर-सुकून लगती है
हर घड़ी तुझ को याद करने से
Irshad 'Arsh'
देखा है अभी तुम ने तुम ने अभी जाना है
लेकिन ये ज़माने का अंदाज़ पुराना है

क्या कार-ए-अज़ीयत है करना उसे रुख़्सत भी
आँसू भी छुपाने हैं हँसकर भी दिखाना है

इस बज़्म-ए-मोहब्बत में कुछ देर ज़रा ठहरो
किस बात की जल्दी है आख़िर कहाँ जाना है

कुछ और कहा होता तो मान भी जाता दिल
पर तुम ने बनाया जो कॉमन सा बहाना है
Read Full
Irshad 'Arsh'
उजाले छोड़ अँधेरों से दोस्ती करता
किसी बहाने से मैं ख़त्म ज़िंदगी करता

इसी कमाल ने मुझ को बचा लिया वर्ना
मैं शा'इरी नहीं करता तो ख़ुद-कुशी करता
Read Full
Irshad 'Arsh'
ज़ख़्म को मत निचोड़ जाने दे
तू न समझेगा छोड़ जाने दे
Irshad 'Arsh'
छोड़ कर हम सुकून-ए-दिल अपना
चल पड़े फिर से शोर की जानिब
Irshad 'Arsh'
इतने शिकवे हैं ज़िंदगी से मुझे
फिर भी नफ़रत है ख़ुद-कुशी से मुझे
Irshad 'Arsh'
ज़िंदगी और कुछ नहीं मुझ को
साथ चलने का हौसला तो दे
Irshad 'Arsh'
जिसे देखो यहाँ दुख दर्द के क़िस्से सुनाता है
मियाँ क़ैद-ए-मशक़्क़त है कोई जन्नत नहीं है ये
Irshad 'Arsh'
भला है के तू ही मय्यसर है मुझ को
तेरा जो न होता किसी का न होता
Irshad 'Arsh'
किस के चेहरे पर हैं कितने दाग़ सब बतलाऊँगा
आइना हूँ मैं किसी के बाप से डरता नहीं
Irshad 'Arsh'
शायद कि इस लिए भी सुख़न-वर हुआ हूँ मैं
मेरी कभी बनी ही नहीं ज़िंदगी के साथ
Irshad 'Arsh'
हमारे गाँव में अब भी ये रस्म क़ायम है
बड़ों के हाथ में बच्चे कमाई देते हैं
Irshad 'Arsh'
ज़रा मुश्किल हो तो एहसास होता है हमें वरना
कहाँ आसानियों में ज़िंदगी मालूम होती है
Irshad 'Arsh'
किसी का आइना हो कर के देखो
मियाँ सच बोलना आसाँ नहीं है
Irshad 'Arsh'
बला कि आफ़तें सिर पे उठा के चलते हैं
हम अपना हौसला ख़ुद ही बढ़ा के चलते हैं
Irshad 'Arsh'
जो बीज बोए गए थे पहले
अब उन सेे पौदे निकल रहे हैं
Irshad 'Arsh'
तुम्हारे पास हो भी सकते हैं थोड़े बहुत लेकिन
हमारे पास जैसे ग़म हैं वैसे ग़म नहीं होंगे
Irshad 'Arsh'
देखो बारिश का मौसम है
देर से आना हो सकता है
Irshad 'Arsh'
खुशबुएँ लूटने वाला भी वही ठहरा है
जो कि मामूर था गुलशन की हिफ़ाज़त के लिए
Irshad 'Arsh'

LOAD MORE