Kartik Bhalerao

Kartik Bhalerao

@kartikbhalerao39

Kartik Bhalerao shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kartik Bhalerao's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
हाथी कुछ इसलिए भी तो सर पर सवार है
चींटी ने दम नहीं किया हाथी के नाक में
Kartik Bhalerao
खलने न दी कभी भी कमी वालिदैन की
इतना किया है प्यार बड़े भाई ने मेरे
Kartik Bhalerao
चलना सँभल सँभल के हबीबों के साथ तुम
ठोकर न लगने देना मेरे एतिबार को
Kartik Bhalerao
जीना हराम कर दिया उस ने तो आप का
सब माल बेचता है वो जैसे हो बाप का

यमराज रोज़ पूछता है चित्रगुप्त से
अब तक घड़ा भरा नहीं क्या उस के पाप का
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Kartik Bhalerao
अब तो पनाह दे मुझे दिल के मकान में
सारा जहान जीत के आया हूँ तेरे पास
Kartik Bhalerao
जाता हूँ जिन के साथ मैं दर्शन को चार धाम
आता है चैन उन को भी लेकर ख़ुदा का नाम

कुछ इसलिए भी यार तेरा सुर्ख़ियों में है
करता हूँ मैं सलाम वो करती है राम राम
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Kartik Bhalerao
उन्हें लगता हैं औरों की तरह मुझ को दिखा कर डर
करेंगे वो मुझे ख़ामोश ऐसा हो नहीं सकता
Kartik Bhalerao
अँधेरे का अगर मातम मनाते बैठ जाएँ हम
कभी अपने क़बीले में उजाला हो नहीं सकता
Kartik Bhalerao
महार तो गए थे सिर्फ़ पाँच सौ लेकिन
हज़ारों पेशवा का दम निचोड़ आए हैं
Kartik Bhalerao
जाएँगे ख़ुद-ब-ख़ुद ही वो मैदान छोड़ के
दीवाने भीम के सभी इक साथ देख कर
Kartik Bhalerao
ज़रूरी तो नहीं हर शख़्स मारा हो मोहब्बत का
किसी का भूख के मारे भी चेहरा सूख जाता है
Kartik Bhalerao
ग़ैरत वो अपनी बेच के मशहूर क्या हुए
बातें सुना रहे मुझे दुनिया जहान की
Kartik Bhalerao
बुज़दिल की तरह भागे हैं मैदान-ए-जंग से
बाज़ी लगाने वाले थे जो अपनी जान की
Kartik Bhalerao
क़लम की नोक पर बनता है हम जैसों का मुस्तक़बिल
हमारा बुत-परस्ती से गुज़ारा हो नहीं सकता
Kartik Bhalerao
मोहब्बत की लकीरें गर हमारे हाथ में आएँ
हैं ग़म जितने भी सीने में सभी औक़ात में आएँ
Kartik Bhalerao
सियासत की लकीरें गर हमारे हाथ में आएँ
हैं ग़म जितने भी मुफ़्लिस के सभी औक़ात में आएँ
Kartik Bhalerao
देता रहा सहारा अँधेरे को रात भर
जुगनू क़फ़स में क़ैद है इतनी सी बात पर

क़ुदरत ने अपनी जेब से सब कुछ दिया तुझे
मारा है किस ने हक़ तेरा ख़ुद ही तलाश कर
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Kartik Bhalerao
रौनक़ तो बढ़ ही जाएगी अब आसमान की
सय्याद को है फ़िक्र परिंदों की जान की
Kartik Bhalerao
रौनक़ तो बढ़ ही जाएगी अब आसमान की
करने लगे हो फ़िक्र परिंदों की जान की

आँखें हमारी छीन के रस्ता दिखाए है
क्या ख़ूब मेहरबानी है उस मेहरबान की
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Kartik Bhalerao
बर्बाद जवानी करने का क्यूँँ टैग लगा है बोतल पर
ये काम ज़माने भर में अब तो प्यार से बेहतर होता है
Kartik Bhalerao

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