Kashif Hussain Kashif

Kashif Hussain Kashif

@kashif_03_

Kashif Khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kashif Khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
मैं उस की याद ही के जनाज़े को ढो रहा
या'नी कि मेरी रूह को आराम मिल गया
Kashif Hussain Kashif
न मैं चल सका हूँ न ये जाँ थकी है
ग़ज़ब कश्मकश में ये अब ज़िंदगी है

सभी ये मुलाज़िम तेरे हो गए हैं
मेरी इन निगाहों में बस बेबसी है
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Kashif Hussain Kashif
मुद्दतों बा'द मेरे दिल को तसल्ली है मिली
मुद्दतों बा'द मेरे घर में तमाशा न हुआ
Kashif Hussain Kashif
ज़ाहिद तेरे ख़याल में किस ने ख़लल है दी
बाक़ी रहा ये दिल में कही बस मलाल है
Kashif Hussain Kashif
माना तेरे ख़िताब के क़ाबिल नहीं हैं हम
फिर भी तो ये कमाल है जाहिल नहीं हैं हम
Kashif Hussain Kashif
तुम्हारे है दामन में बस जी-हुज़ूरी
ये सारी रिफ़ाक़त तो हम को मिली है
Kashif Hussain Kashif
ये मेरे ख़्वाब को इस तरह से न बिखराओ
अजब यही है कि तुम मुझ से यूँँ न घबराओ
Kashif Hussain Kashif
तेरे इन नकाबों में दुनिया बसी है
मेरी चाहतों में तो बस बेबसी है
Kashif Hussain Kashif
नई है मंजिले मेरी मुझे ना टोको अब
मुझे तो साथ बिठाकर कही पे रुक जाओ
Kashif Hussain Kashif
ये जिस्मों को तुम ने लिबासों में रख कर
हया की है देखो क़सम झूठी खाई
Kashif Hussain Kashif
मैं ही था पागल कहीं ख़ुद मेरे ही इमकान से
तोड़ जाता दिल मेरा ही कितने इत्मीनान से
Kashif Hussain Kashif
मुझे तो सफ़र ये बताने लगा है
ये सारा ज़माना ठिकाने लगा है
Kashif Hussain Kashif
अपने ही सभी मेरे तो ज़ालिम को दुआ दे
तेरे तो गुनाहों की सज़ा मुझ को ख़ुदा दे
Kashif Hussain Kashif
आग तू ने क्या लगाई दिल में तो जान ए जिगर
फिर हुआ क्या शहर मेरा दिल जलों का हो गया
Kashif Hussain Kashif
रोज़-ए-जुमा मोमिन अदा कर के नमाज़
जाता कही ज़ीशान में हो के सवार
Kashif Hussain Kashif
उस ने जिस आजिज़ी में डाल दिया
मेरा अपना ही तजरबा था कहीं
Kashif Hussain Kashif
उस की मर्ज़ी जिसे तवक़्क़ो दे
ये तो बस एक है समाँ मेरा
Kashif Hussain Kashif
शाम कितनी थी शबीना यार तेरे साथ में
क्या हुआ जो था मेरा ही हाथ तेरे हाथ में
Kashif Hussain Kashif
कर्बल की ज़मीं है ये शहादत की ज़मीं है
मानो या न मानो ये इबादत की ज़मीं है
Kashif Hussain Kashif
कर के बेबाक बातें वो मुझ सेे यूँँ फिर
देखता रह गया मरहला वो मेरा
Kashif Hussain Kashif

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