Lokesh Singh

Lokesh Singh

@lokeshsi231139

Lokesh Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Lokesh Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
भूख ने है कर दिया नंगा जिसे
उस बदन पे कितने छाले चाहिए
Lokesh Singh
उस पे गुज़री है क्या शहर जाने के बा'द
वो अभी तक न आया है आने के बा'द
Lokesh Singh
रेत भर कर आ गया हूँ ज़िस्म में
अब है मुझ
में दरिया पी जाने का फ़न
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Lokesh Singh
पास बैठे है मिरे कब से वो ख़ामोश बहुत
अपनी पायल को जो छनकाए तो फिर शे'र कहें
Lokesh Singh
बाँध दे शोर को पैरों तले अब तू भी बशर
ज़िस्म को छोड़ के वीरान कहाँ जाता है
Lokesh Singh
बढ़ता रहा बदन में मिरे शोर ज़ख़्म का
मुझ सेे बदन का बच्चा सँभाला नहीं गया
Lokesh Singh
तरसते है यहाँ पर सब ख़ुशी को
किसी से अब नहीं शिकवा किसी को
Lokesh Singh
उम्र भर सामने नज़रो के उसे रखना था
मैं ने उस चाँद की तस्वीर पे आँखें रख दी
Lokesh Singh
हुई है हाजिरी मेरी यहाँ झूटों की बस्ती में
बहुत मुमकिन यहाँ सच बोलने में आज सर जाएँ
Lokesh Singh
दिल में छुपी जो रह गई थी बात अभी तक
करती रही अंदर मिरे बरसात अभी तक
Lokesh Singh
ढूंढ कर लाओ उसे और जहाँ में भर दो
आज दुनिया में फ़रिश्तों की जगह ख़ाली है
Lokesh Singh
जलता रहा चराग़ बयाबान में जहाँ
हम भी चले गए वहाँ पर बेबसी के साथ
Lokesh Singh
इक तबाही गुजर रही अंदर
देख क्या से क्या हो गया हूँ मैं
Lokesh Singh
बसर होगी भला दुनिया में कैसे
बदन से ही फ़क़ीरी जा रही है
Lokesh Singh
किसी ने छुआ था मुझे ख़्वाब में कल
उसी इक छुअन से पिघलने लगे है
Lokesh Singh
ज़ीस्त में जब भी कभी घबरा गया
आप की मौजूदगी महसूस की
Lokesh Singh
आँख को मलते हुए देखा गया है
इक शजर चलते हुए देखा गया है
Lokesh Singh
जिस्म है ज़ख़्म से भरा पूरा
उम्र भर का हिसाब हो जैसे
Lokesh Singh
पास रख सँभाल कर मेरे अदू इस तीर को
रख लिया है बाँध कर मैं ने बदन से पीर को
Lokesh Singh
आँखों में रेत रेत है जाए जिधर नज़र
आँखों से हम ने इतने समुंदर बहा दिए
Lokesh Singh

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