Moni Gopal Tapish

Moni Gopal Tapish

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Moni Gopal Tapish shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Moni Gopal Tapish's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
ज़ख़्म फिर हँस दिया पुराना कोई
आज अश्कों ने फिर बग़ावत की
Moni Gopal Tapish
ऐसे खंडहर को कौन देखे है
घर से निकलो तो सज सँवर के चलो
Moni Gopal Tapish
तू समझ सके कभी मुझ को मेरी निगाह से, कभी यूँँ भी हो
कि ये ख़्वाब था मेरी आँख में, गई रात चुपके से मर गया
Moni Gopal Tapish
मेरी चाहतों की तपिश तुझे, कभी आँच बनके निखारती
तेरा जिस्म सोने का था मगर, मेरे हाथ से ये हुनर गया
Moni Gopal Tapish
कितनी शा
में तेरी आमदो रफ़्त से जगमगाई रहीं
कितनी सुब्हों के चेहरे पे बस इक तेरा नाम लिक्खा रहा
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Moni Gopal Tapish
अपने ही ख़ून में ये जिस्‍म नहाएा अक्सर
मैं ने हिस्सा कभी माँगा नहीं पाया अक्सर

लोग लफ़्ज़ों को भी जागीर समझ लेते हैं
मैं ने लहजा भी बनाया तो मिटाया अक्सर
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Moni Gopal Tapish
एक ग़ज़ल फिर कहना चाहूँ तेरे-मेरे प्यार के नाम
आधा तेरी जीत का क़िस्सा आधा मेरी हार के नाम
इश्क़ मुहब्बत के अफ़साने,रांझा ,मजनूँ या फ़रहाद
सब गुल बूटे ख़ुशबू वाले लेकिन हैं तलवार के नाम
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Moni Gopal Tapish
मेरी फ़ितरत नहीं भूल जाऊँ उसे जो मुक़द्दर में मेरे लिखा ही न हो
लाख हक़ में न हो पर मुझे चाहिए आसमानों का रुख़ वो दहकता हुआ
Moni Gopal Tapish
नीम बिस्मिल हवा आरज़ी तौर पर साँस लेती रही
सांँवला एक मौसम दरख़्तों की शाख़ों पे रक्खा रहा
Moni Gopal Tapish
ग़मों की भीड़ दर्दों की निगहबानी में रहना है
बता ऐ ज़िन्दगी कब तक परेशानी में रहना है

वो अपने कौ़ल से वापस पलट जाए उसे हक़ है
'तपिश' हम को तो अपनी बात के पानी में रहना है
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Moni Gopal Tapish
तू कि रौशन दिए की महक की तरह,सर्द रातों के दिल में
लहकता हुआ

मैं कि सूरज का टुकड़ा मगर बुझ गया, शाम के दर पे आख़िर सिसकता हुआ
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Moni Gopal Tapish
मैं दिल भेजूँ नज़र भेजूँ तड़प भेजूँ असर भेजूँ
कहीं माँगे गए हैं शे'र अच्छे मेरी ग़ज़लों के
Moni Gopal Tapish
इसी सबब से कभी आँख भर नहीं रोए
तुझे भुलाया ही कब था जो याद करते हम
Moni Gopal Tapish
तेरी रफ़्तार गुफ़्‍तार के शोख़ क़िस्से क़लम कर लिए
तेरी बख़्शी हुई नेमतों में तेरा ग़म अकेला रहा
Moni Gopal Tapish
मेरी बरबादियों की यूँँ ख़बर तुम ने सुनी होगी
किसे बर्बाद कहते हैं फ़क़त मैं ही समझता हूँ
Moni Gopal Tapish
कितना मुश्किल किसी जज़्बे को मआ'नी देना
यूँँ तो आसाँ है किसी बात को पानी देना

ये हक़ीक़त है कि कल वो भी बिछड़ जाएगा
आज के झूठ को क्या कल की कहानी देना
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Moni Gopal Tapish
बारिशें अब कि अजब रंजिशें ले कर आईं
एक भी अश्क न आँखों के ठिकाने में रहा
Moni Gopal Tapish
ख़ूब गहरी ख़ूब गहरी ख़ूब गहरी है ख़मोशी
चुप में जो मानी छिपा है वो कहाँ गोयाई में है
Moni Gopal Tapish
रात फिर आँखों की धरती देर तक जलती रही
देर तक अश्कों का सावन टूट कर बरसा किया
Moni Gopal Tapish
कुछ पल हम ने साथ बिताए एक डगर पर
ये क़िस्सा दरियाओं को तुग़्यानी देगा

हम महफ़िल महफ़िल सजने वाले मौसम हैं
कौन बता ऐ तपिश हमें वीरानी देगा
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