Parvez Shaikh

Parvez Shaikh

@pyjn143

Parvez Shaikh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Parvez Shaikh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

3

Content

41

Likes

9

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
याद में तेरी नहीं जो कभी सोया है मैं हूँ
अपने ख़्वाबों में तुझे जिस ने पिरोया है मैं हूँ
Parvez Shaikh
हिज्र-ए-मौसम में अपनी सी कर ली
तू ने हद पार सारी ही कर ली

दिल मिरा टूट ज़ोर से ही गया
बात जब उस ने ग़ैर की कर ली
Read Full
Parvez Shaikh
एक लड़की को इतना चाहने से ही
क्यूँ मुक़द्दर में मेरी हार हो गई
Parvez Shaikh
आप के दर्द की दुआ की है
मौत से हम ने अब वफ़ा की है
Parvez Shaikh
ज़िंदगी चल मिरा क़ुसूर बता
हिज्र क्यूँ काटना पड़ा मुझ को
Parvez Shaikh
आइना झूठ क्यूँ नहीं कहता
टूटना ही अगर मुक़द्दर है
Parvez Shaikh
हाथ आया न कुछ मिरे अब तो
शा'इरी से गुज़ारा कैसे करूँँ
Parvez Shaikh
वो कोई और हैं उधर ढूँढ़ो
जी हुज़ूरी हमें नहीं आती
Parvez Shaikh
ज़ुल्म ऐसा न मेरे साथ करें
ज़िस्म में रूह भी न बाक़ी रहे
Parvez Shaikh
तंज़ जो मुझ पे कर रहा है तू अभी
दाद देगा ज़रूर शे'र पे मिरे
Parvez Shaikh
बात इक तरफ़ा अच्छी होती नहीं
हाल हम सेे भी पूछिए तो कभी
Parvez Shaikh
तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है
मैं ने इक राज़ को ही दिल में बसा रक्खा है

आ ही जाता है तू हर बार मिरे ख़्वाबों में
तेरी ही याद ने दीवाना बना रक्खा हैं
Read Full
Parvez Shaikh
ईद मेरी ख़ुशी से तो गुज़रे
तू मिरे घर से हो के तो गुज़रे

मैं ने अब चाँद भी नहीं देखा
शब तिरी दीद ही पे तो गुज़रे
Read Full
Parvez Shaikh
दिल में हैं वो जफ़ा पे नहीं
इश्क़ मेरा हवा पे नहीं


इतना मासूम है मेरा दिल

बात करता वफ़ा पे नहीं
Read Full
Parvez Shaikh
ज़ुल्म करते हैं हम पे लोग अभी
इतना क्यूँ जलते हम से लोग अभी

हम ने तो हक़ किसी का खाया नहीं
तंज़ कैसे भी देते लोग अभी
Read Full
Parvez Shaikh
नौकरी भी चली ही गई है यूँ तो
ज़िंदगी दर बदर की गई है यूँ तो

कोई दुख को मिरे क्यूँ समझता नहीं
तंज़ की बस सदा दी गई है यूँ तो
Read Full
Parvez Shaikh
वो ज़ालिम ज़रा कुछ तो खौफ़-ए-ख़ुदा कर
कि आ सकती हैं अब क़यामत कभी भी
Parvez Shaikh
कुछ नहीं हो सका वैसे अब क्या करूँँ
जीत के हारा मैं कैसे अब क्या करूँँ

होना जो था वहीं हो गया मेरे साथ
गिर के यूँँ तो उठा जैसे अब क्या करूँँ
Read Full
Parvez Shaikh
ये सच है कि हम ने मुहब्बत नहीं की
कभी दिल ने इतनी भी ज़हमत नहीं की

मिला ज़ख़्म अपनो से हम को हमेशा
किसी से कभी भी अदावत नहीं की
Read Full
Parvez Shaikh
क्या कहूँ कुछ कहा भी नहीं जाता है
बिन तिरे अब रहा भी नहीं जाता है

ज़ख़्म ऐसा के मरहम कोई भी नहीं
मुझ से ये सब सहा भी नहीं जाता है
Read Full
Parvez Shaikh

LOAD MORE