Sagar Kaushik

Sagar Kaushik

@sagarkaushik1857

Sagar Kaushik shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sagar Kaushik's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
क्यूँ भला बंदगी करे कोई
उस के पैरों को चूम ले कोई

एक सागर है उस की आँखों में
उस को ग़ज़लों में ढाल दे कोई
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Sagar Kaushik
कभी कहीं जो मिलो तो तुम पे मैं सारा ग़ुस्सा उतार लूँगा
तुम्हारे माथे को चूम कर मैं तुम्हारा सदक़ा उतार लूँगा

उदास लम्हों में मैं कभी भी तुम्हें अकेला न रहने दूँगा
मैं अपनी ज़ुल्फ़ें बिगाड़ लूँगा मैं अपना चेहरा उतार लूँगा
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Sagar Kaushik
तुझ को नहीं पता तो बता दूँ कि ऐ रक़ीब
शाहों का शाह हूँ मैं क़लन्दर हूँ जान ले

वो आग है कि तू उसे छूने से ख़ौफ़ खा
बाक़ी रही मेरी तो मैं 'सागर' हूँ जान ले
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Sagar Kaushik
तुम हो मधु का प्याला तुम को कब ये समझ में आएगा
उम्र के साथ इस हुस्न का नश्शा और भी बढ़ता जाएगा
Sagar Kaushik
भले दस्तरस में कई और हसीं हैं
तुम्हारी कमी पर तुम्हारी कमी है
Sagar Kaushik
दूरी से भी इन
में दूरी नइँ आती
दिल के रिश्ते दिल के रिश्ते होते हैं
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Sagar Kaushik
वो दरिया रोक कर बैठी है जाने कितने बरसों से
मैं कब से आस में हूँ कब मिरा दामन भिगोएगी
Sagar Kaushik
अक़्ल का पर्दा हटाया तो वो नज़र आया
तेरी नज़रों से जो देखा तो वो नज़र आया
Sagar Kaushik
यूँँ तो मेरा इश्क़ बहुत पाकीज़ा है
लेकिन मेरी उम्र बहकने वाली है
Sagar Kaushik
किसी को याद मेरी आ रही थी
मैं उस की सम्त चलता जा रहा था
Sagar Kaushik
जाह्नवी के तट पे तन्हा देखता है
इक सितारा आसमाँ से ख़ुद को मुझ
में
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Sagar Kaushik
जो तुम सेे दूर जाने को किसी के पास जाता हूँ
तुम्हारी याद तब कॉलर पकड़ कर खींच लेती है
Sagar Kaushik
उस के उतने शे'र मुकम्मल होते हैं
जिस ने जितनी ख़ाक उड़ाई होती है
Sagar Kaushik
अब मुझ को हर ओर सुनाई देता है
सन्नाटे का शोर सुनाई देता है
Sagar Kaushik
ऐसा नहीं सहता नहीं
बस तुम सेे कुछ कहता नहीं

थोड़ी सी जो पी लूँ शराब
औक़ात में रहता नहीं
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Sagar Kaushik
क्यूँ इतना तू परेशाॅं होता है ऐ मिरी जाॅं
मैं हूँ ना साथ तेरे ज़िंदा है तेरा 'सागर'
Sagar Kaushik
सुनसान सड़क तन्हाई में
इक रंज है इस पुरवाई में

कल तक जो घिरा था लोगों से
वो आज मरा तन्हाई में
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Sagar Kaushik