Subhan Asad

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Subhan Asad shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Subhan Asad's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
डाली है ख़ुद पे ज़ुल्म की यूँँ इक मिसाल और
उस के बग़ैर काट दिया एक साल और
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मुस्करा देना अचानक कहीं मिल जाने पर
और मुझे भूल न जाने का दिखावा करना
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मेरे शाइ'र! मैं वही हुस्ने-दिलावेज़, जिसे
चाहने वाले बहुत, जानने वाले कम हैं
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ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है
राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं
Subhan Asad
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तेरी यादों की धूप आने लगी है
अभी खुल जाएगा मौसम हमारा
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दो घड़ी को पास आया था कोई
दिल पे बरसों हुक्मरानी कर गया
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हम कुछ ऐसे उस के आगे अपनी वफ़ा रख देते हैं
बच्चे जैसे रेल की पटरी पर सिक्का रख देते हैं

तस्वीर-ए-ग़म, दिल के आँसू, रंज-ओ-नदामत, तन्हाई
उस को ख़त लिखते हैं ख़त में हम क्या क्या रख देते हैं
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तू ने सोचा भी है जानाँ कि तेरे वादे ने
कितनी सदियों से नहीं पहना अमल का पैकर
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जब भी उस कूचे में जाना पड़ता है
ज़ख़्मों पर तेज़ाब लगाना पड़ता है

उस के घर से दूर नहीं है मेरा घर
रस्ते में पर एक ज़माना पड़ता है
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Subhan Asad
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जब बुलंदी का गुमाँ था तो नहीं याद आई
अपनी परवाज़ से टूटे तो ज़मीं याद आई

वही आँखें कि जो ईमान-शिकन आँखें हैं
उन्हीं आँखों की हमें दावत-ए-दीं याद आई
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Subhan Asad
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पकड़ में आती नहीं है कभी वो शाख़-ए-विसाल
हम एक बोसा-ए-गुल के लिए तरसते हैं
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उस ने पूछा था पहले हाल मेरा
फिर किया देर तक मलाल मेरा

मैं वफ़ा को हुनर समझता था
मुझ पे भारी पड़ा कमाल मेरा
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ये मेरी ज़िद ही ग़लत थी कि तुझ सेा बन जाऊँ
मैं अब न अपनी तरह हूँ न तेरे जैसा हूँ

हमारे बीच ज़माने की बद-गुमानी है
मैं ज़िंदगी से ज़रा कम ही बात करता हूँ
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यही तलब है जो जीना सिखाए जाती है
तुम्हारे ख़्वाब न देखें तो कब के मर जाएँ
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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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तुम्हें देखे ज़माना हो गया है
नज़र महके ज़माना हो गया है

बिछड़के तुम सेे आँखें बुझ गई हैं
ये दिल धड़के ज़माना हो गया है
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कौन देकर गया दुआ दिल को
उम्र भर दर्द ही रहा दिल को

दस्तकें दे रहा है कुछ दिन से
हम सेे क्या काम पड़ गया दिल को
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ये सानिहा भी शब-ए-हिज्र आ पड़ा हम पर
तेरा ख़याल तो आया तेरी तलब न हुई
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उस ने ये कहके मुझे छोड़ दिया
हाशिया छोड़ दिया जाता है
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ये मेरी ज़िद ही ग़लत थी कि तुझ सेा बन जाऊँ
मैं अब न अपनी तरह हूँ न तेरे जैसा हूँ
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