Dr Bhagyashree Joshi

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@sweetyJoshi091

Sweety Joshi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sweety Joshi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
बिछड़ कर मैं तुम सेे किधर जाऊँगी
मुझे लगता है मैं बिखर जाऊँगी

मैं मन्नत का धागा लिए हाथ में
जिधर भी कहोगे उधर जाऊँगी
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Dr Bhagyashree Joshi
इंतिज़ार-ए-इश्क़ की इस प्यास का क्या कीजिए
सुर्ख़ सूखे होंठों को महबूब की दरकार है
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मिलन की हो अगर जल्दी तो दरिया से ज़रा पूछो
समुंदर तक पहुॅंचने में लगे अरसे तुम्हें कितने
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क़ज़ा आई थी कल मिलने उसे ये कह के रोका है
जनाज़ा एक लड़की का पिया के घर से जाता है
Dr Bhagyashree Joshi
मेरे रुख़सार से ज़ुल्फ़ों को वो जब जब हटाता है
वो कहता है नज़र उस को मह-ए-ख़ुर्शीद आता है
Dr Bhagyashree Joshi
मुहब्बत मुद्दतों के बा'द बिखरी है हथेली पर
हिना का रंग उस के इश्क़ की हद को बताता है
Dr Bhagyashree Joshi
सर आँखों पर रखते उठा कर तब मुझे सब
मंदिर में जलती काठ की गर राख होती
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कुछ होता यूँँ दहलीज़ की मैं ख़ाक होती
तो रोज़ तेरे पैर छू कर पाक होती
Dr Bhagyashree Joshi
गवाही दे रहे हैं आँखों के काले घने घेरे
तुम्हारी याद में कल रात भर जागी हुई हूँ मैं
Dr Bhagyashree Joshi
आरिज़ों को चूमने की ताक में रहता है हर दम
तेरा दिलवाया हुआ झुमका भी तेरे हू-ब-हू है
Dr Bhagyashree Joshi
निकल कर आँख से ये अश्क जब दिल तक पहुँचते हैं
तभी मतलब समझ आता नमक ज़ख़्मों पे पड़ने का
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उठा कर सर कहूँ सब से मैं हूँ उस देश की वासी
बुलंदी के निशाँ छोड़े हैं जिस ने चाँद पर अपने
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सुना है चाँद रात उस के फ़क़त आ जाने से छत पे
कई दीवानियों ने ईद का ऐलान कर डाला
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जिस्म की चादर में छुपती हर जवानी आग है
नाम देकर इश्क़ का सब को बुझानी आग है
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बुला कर पास तू अपने सितारों की रिदा दे दे
बहुत ही थक गई हूँ मैं मुझे सोना है अब मौला
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चूम कर मेरी कलाई बस यही उस ने कहा
रंग सावन का उतर कर आ गया है हाथ में
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भीख ये हर साल मुझ को कम से कम दो बार दो
आँखों के कश्कोल को तुम भीख में दीदार दो
Dr Bhagyashree Joshi
इश्क़ में हारा तो पहले दिल मेरा पत्थर बना
फिर तुम्हारी याद ने कतबा बना डाला इसे
Dr Bhagyashree Joshi
दर्द को अपने छुपाता शा'इरी ग़ज़लों में जो
आह में भी वाह सुनता सच में वो शहबाज़ है
Dr Bhagyashree Joshi
मुझे रहना वहाँ साया तुम्हारा है जहाँ माधव
निगाहें खोजती तुम को छुपे हो तुम कहाँ माधव

तुम्हारे होंठ बंसी के बसे दिल में सदा राधा
मगर पैरों की रेणू है जहाँ मीरा वहाँ माधव
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