Varun Anand

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@varun-anand

Varun Anand shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Varun Anand's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
लोगों को उस का नाम बताने से रह गया
इक लफ़्ज़ था जो शे'र में आने से रह गया

इस बार भी उसी की सुनी उस की मान ली
इस बार भी मैं अपनी सुनाने से रह गया
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Varun Anand
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तेरे कहने से ये जादू नहीं होने वाला
अब सितारा कोई जुगनू नहीं होने वाला

फिर भी बेताब हूँ कितना मैं तेरा होने को
जानता हूँ कि मेरा तू नहीं होने वाला
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Varun Anand
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प्यार मेरी कमज़ोरी थी और उस ने मुझे
जी भर कर कमज़ोर किया फिर छोड़ दिया
Varun Anand
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बड़ी जल्दी में था उस दिन ज़रा बेचैन भी था वो
उसे कहना था कुछ मुझ सेे मगर वो कह नहीं पाया
Varun Anand
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न जाने कौन सी आए सदा पसंद उसे
सो हम सदाएँ बदल कर सदाएँ देते रहे
Varun Anand
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जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है
उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़
Varun Anand
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एक दिन की ख़ुराक है मेरी
आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
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हम पे एहसान हैं उदासी के
मुस्कुराएँ तो शर्म आती है
Varun Anand
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महीनों फूल भिजवाने पड़े थे
वो पहली बार जब रूठा था मुझ से
Varun Anand
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ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है
मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है

तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं
जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
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Varun Anand
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मैं ने जैसी चाही थी ना वैसी इन
में खनखन नइँ
जितने प्यारे हाथ हैं तेरे उतने प्यारे कंगन नइँ
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Varun Anand
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हमीं तलाश के देते हैं रास्ता सब को
हमीं को बा'द में रस्ता दिखाया जाता है
Varun Anand
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तुझ को छू कर और किसी की चाह रखें
हैरत है और लानत ऐसे हाथों पर
Varun Anand
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मेरे क़ुबूल पे उस ने क़ुबूल कह तो दिया
पर एक बार कहा उस ने तीन बार नहीं
Varun Anand
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इतना ऊँचा उड़ना भी कुछ ठीक नहीं
पाबंदी लग जाती है परवाज़ों पर

तुझ को छू कर और किसी की चाह रखे
हैरत है और लानत है ऐसे हाथों पर
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Varun Anand
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हमारी मर्ज़ी से अब क्या बदलने वाला है
तुम्हारे कब्ज़े में वोटिंग मशीन है साहब
Varun Anand
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ये कितनी लाशें सहेजे किसे कहाँ रक्खें
कि तंग आ गई है अब ज़मीन लोगों से
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हाकिम को इक चिट्ठी लिक्खो सब के सब
और उस
में बस इतना लिखना लानत है
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Varun Anand
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त

हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आप के चू
में हुए दरख़्त
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Varun Anand
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उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है
उस के सपने एक तरफ़ हैं मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
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