Zohair Ahmad Sahil

Zohair Ahmad Sahil

@zohairahmad7

Zohair Ahmad Sahil shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zohair Ahmad Sahil's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
इक फ़क़त आप की ख़ुशी के लिए
दिल ने एहसान हर किसी के लिए
Zohair Ahmad Sahil
अगर पीछे ये दीवाना पड़ेगा
तुम्हें इस दिल में बस जाना पड़ेगा

मिरी आवाज़ पहुँचेगी ज़हाँ तक
वहाँ तक आप को आना पड़ेगा
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Zohair Ahmad Sahil
बेक़रारी में मुझ को सहारा मिला
मुझ से दिलदार मेरा दोबारा मिला

ग़म की बेताब शा
में बदलने लगीं
दिल के दरिया को फिर से किनारा मिला
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Zohair Ahmad Sahil
राज कितने छुपाए हुए हैं
ख़ून से भी नहाए हुए हैं

दिल की बस्ती कहीं इक बसी थी
हम उसी के सताए हुए हैं
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Zohair Ahmad Sahil
उस दिल में मैं बसा नहीं क्या फ़र्ज़ की अदा नहीं
वो कहती हैं वफ़ा नहीं क्या मर्ज़ की दवा नहीं

ग़म तो बहुत मिले मगर ये ज़ख़्म तो सिला नहीं
तकलीफ़ क्या कहें मगर उस रस्ते से गिला नहीं
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Zohair Ahmad Sahil
ख़्वाबों की दिन रात मेरी
ग़म की ये बारात मेरी

आई मेरे दिल में तो है
सपनों की सौग़ात मेरी
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Zohair Ahmad Sahil
दिल चुरा कर गया दिल लगा कर गया
ग़म का नग़्मा यहाँ गुनगुना कर गया

कोई तो राज़ दिल में दबाए वो था
जो भी अपनी वफ़ा को मिटा कर गया
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Zohair Ahmad Sahil
दिल एक तो फ़ुन्कारी है
जिस पर शरारत तारी है

ये जो शिकारी हैं नए
इन की सदाक़त प्यारी है
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Zohair Ahmad Sahil
ये डरना कैसा डरना है
जब मरना तो क्या जीना है
Zohair Ahmad Sahil
हमें जी भर के पीने दो
कुछ और दिन मुझ को जीने दो

ये ज़ख़्म-ए-हिज्र है यारा
इसे कुछ और सीने दो
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Zohair Ahmad Sahil
इक दिया था ग़म में सजा हुआ अपने ही दम पर डटा हुआ
जिस की दीद थी मेरी ज़िंदगी वो कहीं पर है सजा हुआ
Zohair Ahmad Sahil
तुम्हें दिल में बसाया तो सही
तुम्हें अपना बनाया तो सही
Zohair Ahmad Sahil
ग़म को वीरान बनाया था कभी
ऐसा ईमान बनाया था कभी
Zohair Ahmad Sahil
ज़ीस्त है मुझ सेे ख़फ़ा लेकिन गिला कोई नहीं
मसअला ये है कि मेरा मसअला कोई नहीं

कट रही है ज़िंदगी बेकार फ़ुर्सत में यूँँ ही
मश्ग़ला ये है कि मेरा मश्ग़ला कोई नहीं
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Zohair Ahmad Sahil