Zubair Ali Tabish

Zubair Ali Tabish

@zubair-ali-tabish

Zubair Ali Tabish shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zubair Ali Tabish's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
मुरली छूटी शंख बजा रास तजा फिर युद्ध सजा
क्या पीछे क्या आगे है सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मैं रस्मन कह रहा हूँ ''फिर मिलेंगे''
ये मत समझो कि वा'दा कर रहा हूँ
Zubair Ali Tabish
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अदाकार के कुछ भी बस का नहीं है
मोहब्बत है ये कोई ड्रामा नहीं है

जिसे तेरी आँखें बताती हैं रस्ता
वो राही कहीं भी पहुँचता नहीं है
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Zubair Ali Tabish
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हम इक ही लौ में जलाते रहे ग़ज़ल अपनी
नई हवा से बचाते रहे ग़ज़ल अपनी

दरअस्ल उस को फ़क़त चाय ख़त्म करनी थी
हम उस के कप को सुनाते रहे ग़ज़ल अपनी
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Zubair Ali Tabish
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात
बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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अब न निकलूँगा तेरी बाँहों से, अपनी हद में रहा करूँँगा मैं
मेरे सीने में है मेरा उस्ताद इसने जो भी कहा करूँँगा मैं
Zubair Ali Tabish
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो
बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है
हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से
ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है

ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो
मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
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Zubair Ali Tabish
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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी
इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं
वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं

वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी
अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
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Zubair Ali Tabish
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वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी
अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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कोई काँटा कोई पत्थर नहीं है
तो फिर तू सीधे रस्ते पर नहीं है

मैं इस दुनिया के अंदर रह रहा हूँ
मगर दुनिया मेरे अंदर नहीं है
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Zubair Ali Tabish
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भीगी पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं
वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं

वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी
अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
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Zubair Ali Tabish
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ये कहते हो तिरे जाने से दिल को चैन आएगा
तो जाता हूँ, ख़ुदा हाफ़िज़! मगर तुम झूठ कहते हो
Zubair Ali Tabish
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इश्क़ में ये दावा तो नईं है मैं ही अव्वल आऊँगा
लेकिन इतना कह सकता हूँ अच्छे नंबर लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है
कहाँ तक कार का पीछा करोगे?
Zubair Ali Tabish
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प्यार दो बार थोड़ी होता है
हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है

यही बेहतर है तुम उसे रोको
मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
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Zubair Ali Tabish
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अपने बच्चों से बहुत डरता हूँ मैं
बिल्कुल अपने बाप के जैसा हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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ज़िक्र हर-सू बिखर गया उस का
कोई दीवाना मर गया उस का

उस ने जी भर के मुझ को चाहा था
और फिर जी ही भर गया उस का
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Zubair Ali Tabish
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