Amit Joshi anhad

Amit Joshi anhad

@A_myth

Amit Joshi anhad shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Amit Joshi anhad's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Nazm
कोने में जब खड़ी वो अपनी बाँह मोड़ती है
मुमकिन, मेरे ख़याल की परछाई ओढ़ती है

पुल ही नहीं है ज़रिया, दो पहाड़ जोड़ने का
शायद के उस सेे मुझ को कोई खाई जोड़ती  है
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Amit Joshi anhad
वो वस्ल वाली रात फिर से चाहता है
मतलब के उस को फिर बिछड़ कर देखना है
Amit Joshi anhad
मैं सोच रहा होता हूँ बात खतम हो जाए
वो क़िस्सा कोई नया सुनाने लगती है

मैं जब भी उस सेे दूर निकलने लगता हूँ
वो मुझ को अपने पास बुलाने लगती है
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Amit Joshi anhad
यूँँ ही उम्मीद से ख़ुद को बांधा रहा, जैसे ख़्वाबों के कपड़ो का धागा रहा
रेत आँखों के कोनो में यूँ जम गई, रात सोइ रही में तो जागा रहा
Amit Joshi anhad
न कमी तलाशो न बुराई देखो
जो दुनिया उस ने दिखाई देखो

ना वास्ता दो किसी को दिल का
फिर भी किस ने निभाई देखो
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Amit Joshi anhad
एक तरफ़ उँगलियों पे चुनाव की कालिख
एक तरफ़ उड़ती दिखे शमशान की कालिख

एक तरफ़ जनता जो जल के ख़ाक हो रही
एक तरफ़ इंसनियत पर पुत रही कालिख
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Amit Joshi anhad
तुम्हें देख कर आँख भर तो गई है
मगर आँख भर अब भी देखा नहीं है
Amit Joshi anhad
क्यूँ ऐसा रिश्ता क़ाएम रखना जिस
में केवल दर्द मिलें
ना धूप मिले न छाव मिले बस मौसम सारे सर्द मिलें
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Amit Joshi anhad
क्या आज भी सोच कर मुझ को तुम्हें गर्माहट होती है?
जैसे तेरे ख़याल भर से ज़ेहन में मेरे घबराहट होती है
Amit Joshi anhad
याद कर के जब भी मुझ को सोचना तुम
मेरी आँख की बारिश को ख़ुद ही पोंछना तुम

मैं सवाल-ए-हक़ करूँँगा लाज़िमी है
मैं ग़लत हूँ झूठ कह कर रोकना तुम
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Amit Joshi anhad