Aryan Goswami

Aryan Goswami

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Aryan Goswami shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aryan Goswami's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
किसी की बाँह भी ख़ाली नहीं की रो सकूँ जिस
में
तुम्हारे जिस्म से ये मन बहुत उक्ता गया सा है
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Aryan Goswami
तुम्हारे बा'द अब हम ईद मनाऐं भी तो कैसे
तुम्हारे बा'द किसी चाँद की सूरत नहीं देखी
Aryan Goswami
आने वाली ईद से उन को क्या मतलब
चाँद छुपा के बटुए में जो रखते है
Aryan Goswami
पानी जैसे काट रहा है पत्थर को आहिस्ता से
शे'रों की बारीकी भी कुछ ऐसे जानी जाती है
Aryan Goswami
सदियों पहले छोड़ चुका हूँ दामन फिर भी जाने क्यूँँ
मेरे चादर से अब तक उस शख़्स की ख़ुशबू आती है
Aryan Goswami
तेरे दिल का हर एक पहलू छुआ गया है तबीअत से
रंगे रस्मों प्यार मोहब्बत किया गया है तबीअत से
Aryan Goswami
कई दुश्वारियाँ गुज़री तुम्हारा ग़म नहीं गुजरा
ज़ख़्म थे जब बदन पे, कोई मरहम नहीं गुजरा
Aryan Goswami
मुझ सेे बिछड़ कर कहाँ लग रहा है
बताओ ज़रा ये जहाँ लग रहा है

उन्हीं से ख़ुश रहने की,की थी गुज़ारिश
वो ख़ुश है तो देखो बुरा लग रहा है
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Aryan Goswami
रात तुम्हारी याद में गुज़रे दिन दफ़्तर खा जाता है
एक तुम्हारा चेहरा ज़ेहन में अक्सर आता जाता है

तुम को तुम हो मुझ को मैं हूँ हम की कोई जगह नहीं
एक बेचारा दिल है मेरा ख़्वाहिश में मर जाता है
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Aryan Goswami
उस की ख़ुशी में, है ख़ुशी मेरी
बस इसी झूठ का सहारा है
Aryan Goswami
हम सेे ज़्यादा महँगा कौन बिकेगा आज
माँ का माथा चूम के बिकने निकला हूँ
Aryan Goswami
मोहब्बत दो दिलो का मेल है रस्मो से मत जोड़ो
रहो कुछ दिन जिओ जी भर और फिर रास्ता छोड़ो
Aryan Goswami
अब से कोई भी वास्ता हम सेे नहीं रखना
जा ही रहे हो तो पलट कर देखना भी मत
Aryan Goswami
कितने एहसास दफ़्न होते है रोज़ यहाँ
हमारे दिल को क़ब्रिस्तान क्यूँ नहीं कहते
Aryan Goswami
तकलीफ़ में है वो भी मुझे देख के तन्हा
मजबूरी उस की ये है कुछ कर नहीं सकती
Aryan Goswami
दर्द ऐसे भी हम छुपाते है
कोई पूछे तो ग़लत वाक़या बताते हैं

कई हादसे सहें तो हुआ ये मालूम
ज़ख़्म नाशूर भी हो जाएँ तो भर जाते हैं
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Aryan Goswami
इतने सलीक़े से चल रही थी ज़िंदगी
और एक दिन आप का उठकर चला जाना हुआ
Aryan Goswami
मैं वो शख़्स हूँ जो ख़ुद से ख़फ़ा हूँ लेकिन
है इतनी इल्तेजा तुम कभी नाराज़ मत होना
Aryan Goswami
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कोई भी ग़ज़ल मेरी मुकम्मल नहीं होती
इस को कहीं मुझ सेे मोहब्बत तो नहीं है
Aryan Goswami
नई बातें पुराना ग़म सभी को छोड़ सकता हूँ
तुम्हीं से प्यार करता हूँ तुम्हीं को छोड़ सकता हूँ

इसी एक कस्म कस में हूँ की क्या बोलूँ
ना रिस्ता तोड़ सकता हूँ ना रिस्ता जोड़ सकता हूँ
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Aryan Goswami

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