Jatin shukla

Jatin shukla

@Jatin@fzd

Jatin shukla shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Jatin shukla's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
और किसी का क़ब्ज़ा होना लाज़िम है
इस बंजर का सहरा होना लाज़िम है

इनसे पहले वाले साहब गूँगे थे
सो इनका भी बहरा होना लाज़िम है
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Jatin shukla
वर्ना तोहफ़े दिल्ली भेजे जाते पर
चूड़ी का अपमान नहीं कर सकता मैं
Jatin shukla
मिला दे कोई ऐसे ज्योतिषी से
मिटाए दोष जो भी कुंडली से

जो राजा हो महल स्वीकार ले वो
मैं जोगी हूँ मुझे मतलब कुटी से
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Jatin shukla
पूर्ण अधिकार जिस पर हमारा रहा
एक मुखड़ा जो आँखों का तारा रहा

एक लड़का बदन जिस का ब्याहा गया
एक लड़का जो मन से कुँवारा रहा
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Jatin shukla
प्राण को देह से दूरी दे देगा कल
राज्य धर्म ऐसी मजबूरी दे देगा कल

एक धोबी ने अपराध तय कर दिया
एक राजा भी मंज़ूरी दे देगा कल
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Jatin shukla
ऐसे बैठे हैं हम उस की चौखट पर
प्यासा जैसे बैठा रहता पनघट पर

पर्दा करना हुस्न छुपाना नइँ होता
पहरे का आरोप ग़लत है घूँघट पर
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Jatin shukla
जैसे जैसे लड़की पाँव बढ़ाती है
पानी में ख़ुद ही हलचल मच जाती है

इन भँवरों की जात है केवल मँडराना
असल मज़ा फूलों का तितली पाती है
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Jatin shukla
गुलशन से ही दूर करोगे फूलों को
या'नी चकनाचूर करोगे फूलों को

तितली से बिछड़ेंगे तो मर जाएँगे
क्यूँ इतना मज़बूर करोगे फूलों को
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Jatin shukla
मूल्य एक से चार किया है फूलों का
यूँँ महँगा बाज़ार किया है फूलों का

तुम क्या जानो पीड़ा बेबस तितली की
तुम ने तो व्यापार किया है फूलों का
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Jatin shukla
मकाँ मालिक का रुत्बा चाहता है
किराया-दार क़ब्ज़ा चाहता है
Jatin shukla
तू हुस्ना हुस्न को महफ़ूज़ रखना
मैं आशिक़ हूँ नज़र से चूम लूँगा
Jatin shukla
तुम्हारी कॉल आए या न आए
तुम्हारी याद तो आती रहेगी
Jatin shukla
पैरवी गर हमारी करो आशिकों
तो मुक़दमा करूँँ बेवफाओं पे मैं
Jatin shukla
दो झुके नयनों ने जो दिनभर किया संवाद ले कर
मैं अयोध्या लौट आया लखनऊ से याद ले कर

तीन झुमका चार बोसा पाँच झप्पी आठ कंगन
रख दिया है पर्स में पूरा अमीनाबाद ले कर
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Jatin shukla
आज लड़की नई इक नमाज़ी बनी
देखना भीड़ कल से बढ़ेगी यहाँँ
Jatin shukla
मैं केवल कह सका होली मुबारक़
वो त्योहारी का बोसा दे गया कल
Jatin shukla
आज उस ने कहा कॉल कर के मुझे
छोड़ सिगरेट दो तुम अभी के अभी
Jatin shukla
बदन में थरथराहट रूह काँपे
किसी को चूमना आसान है क्या
Jatin shukla
अभी तो पांँच बोसे ही हुए हैं
अभी दस और दो तब फ़ोन रखना
Jatin shukla
अभी मत ज़ख़्म पर मरहम लगाओ
अभी कुछ शे'र बाक़ी हैं ग़ज़ल के
Jatin shukla

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