Khan Janbaz

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Khan Janbaz shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Khan Janbaz's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
मिन्नतें करता था रुक जाओ मेरा कोई नहीं
मेरे रोके से मगर कौन रुका कोई नहीं

बेवफ़ाई को बड़ा जुर्म बताने वाले
याद है तू ने भी चल छोड़ हटा कोई नहीं
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Khan Janbaz
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अल्लाह बना दे मिरे अश्कों को कबूतर
सब पूछ रहे हैं तिरे रूमाल में क्या है
Khan Janbaz
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उस से कहना था के वो कितना ज़रूरी है मुझे
आ रहा हूँ अभी जिस शख़्स से झगड़ा कर के
Khan Janbaz
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इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग
हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग
Khan Janbaz
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इश्क़ भी अपनी ही शर्तों पे किया है मैं ने
ख़ुद को बेचा नहीं बाज़ार में सस्ता कर के

उस से कहना था के वो कितना ज़रूरी है मुझे
आ रहा हूँ अभी जिस शख़्स से झगड़ा कर के
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Khan Janbaz
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बच गया है जो तेरा थोड़ा सा हिस्सा मुझ में
अब तलक मुझ को किसी का नहीं होने देता
Khan Janbaz
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