Vijay Anand Mahir

Vijay Anand Mahir

@Mahir

Vijay Anand Mahir shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vijay Anand Mahir's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

8

Content

66

Likes

242

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
तुम्हें ख़ुश देख कर ख़ुश हूँ मगर ये दुख नहीं जाता
कहाँ पर दाद देनी थी कहाँ पर दे रहे हो तुम
Vijay Anand Mahir
ख़ुद-कुशी करने से बेहतर ज़िंदगी के खेल में
फीस पूरी दीजिए पूरा तमाशा देखिए
Vijay Anand Mahir
एक कुर्सी के यहाँ पर कितने दावेदार हैं
इश्क़ में भी देखिए साहब सियासत है बहुत
Vijay Anand Mahir
नाविक चप्पू धीरे मारो
मछली का घर हिल जाता है
Vijay Anand Mahir
इतनी प्यास नहीं है मुझ को
जितना पानी मिल जाता है
Vijay Anand Mahir
जाने किस वक़्त ये उतर जाए
ज़िंदगी भी शराब जैसी है
Vijay Anand Mahir
पहले-पहल थोड़ी तो मुश्किल जाएगी
पर दिल की बगिया फिर से खिल जाएगी

गर तुझ को मुझ सेे अच्छा मिल सकता है
तो मुझ को तुझ सेे अच्छी मिल जाएगी
Read Full
Vijay Anand Mahir
24 Likes
तुम्हारी एक हरकत से उदासी आए चेहरे पर
किसी को इस तरह भी मत करो लाचार होली में
Vijay Anand Mahir
खिला कर भंग की गुजिया समा रंगीन कर दो तुम
बड़ी मुश्क़िल से तो हो पाया है दीदार होली में
Vijay Anand Mahir
भुला दो रंग नफ़रत के , तिरंगा हाथ में ले कर
दिखा दो तीन रंगों का सभी को प्यार होली में
Vijay Anand Mahir
ख़यालों के सफ़र में संग जाऊँगा
सभी अपने बदलते ढंग जाऊँगा

वहाँ बस आप ख़ुद को रंगते जाओ
यहाँ मैं ख़ुद-ब-ख़ुद ही रंग जाऊँगा
Read Full
Vijay Anand Mahir
उस ने, मुझ को, जिस की ख़ातिर छोड़ दिया
उस ने भी तो उस को आख़िर छोड़ दिया
Vijay Anand Mahir
22 Likes
अपना रिश्ता बिल्कुल ऐसा रिश्ता है
जैसा रिश्ता कपड़ों का अलमारी से
Vijay Anand Mahir
सौंप दीं हम ने जिसे सब दौलतें
वो ही निकला है लुटेरा क्या करें
Vijay Anand Mahir
ख़ुशी तो बस ज़रा सी रह गई है
उदासी ही उदासी रह गई है

बदन की प्यास सारी मिट गई पर
हमारी रूह प्यासी रह गई है
Read Full
Vijay Anand Mahir
वक़्त ने कुछ ऐसा घेरा क्या करें
मन बहुत था तेरा मेरा क्या करें
Vijay Anand Mahir
भले जीत कर वो बदन ले गया है
मगर रूह पर है हुकूमत हमारी
Vijay Anand Mahir
तुझ को पाते तो कब के मर जाते
तेरी यादों ने ज़िंदा रक्खा है
Vijay Anand Mahir
पाक हो या के हो नापाक बदन
होंगे इक रोज़ सभी ख़ाक बदन
Vijay Anand Mahir
बदनामी यूँँ भी होती है
'माहिर' बस ग़ज़लें कहता है
Vijay Anand Mahir

LOAD MORE