Amaan mirza

Amaan mirza

@Mirzaji

Amaan mirza shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Amaan mirza's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

5

Content

99

Likes

226

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
इज़्ज़त करूँँगा मैं भी रहूँगा लिहाज़ में
तू चीख़ता रहेगा अगर एक साज़ में

महफ़िल में अच्छी शा'इरी की क्या बढ़ी डिमांड
कव्वे भी ख़ुद को गिनने लगे सरफ़राज़ में
Read Full
Amaan mirza
न मेरा है न किसी और के बाप का सूरज
है इन दिनों तो बुलंदी पे आप का सूरज

गुज़र रही है शब ए ग़म इस आस में तन्हा
के एक दिन तो उगेगा मिलाप का सूरज
Read Full
Amaan mirza
कुछ उस का हूँ कुछ इस का कुछ हूँ बाक़ी दरमियाँ
तेरा हो जाउँगा बस तू मोहब्बत पूरी कर
Amaan mirza
बड़ी मुश्क़िल से मियाँ मिलती है इक आसानी
लोग आसान समझ लेते हैं आसानी को
Amaan mirza
मौत इक अर्श है ये ज़िंदगी है एक सुतून
और सुतून ऐसा जिसे काट रहे हैं हम लोग
Amaan mirza
नहीं आसान इंसाँ हो के हर इक की ख़बर रखना
बहुत सारे तअल्लुक़ टूट जाते हैं तग़ाफुल में
Amaan mirza
कुछ ऐसे करता है वो मुझ सेे बात आहिस्ता आहिस्ता
के मालो ज़र की बढ़ती हो ज़कात आहिस्ता आहिस्ता
Amaan mirza
ये आज कल नए लौंडे हमारे शे'रों में
कमी टटोलते हैं उस पे काम करते नहीं
Amaan mirza
खा गया इश्क़ मौज मस्ती के दिन
यार लानत है इस जवानी पे
Amaan mirza
मुझ सेे अब दूर भागती हो तुम
दिल किसी और को देकर आ गई क्या

दी पलट हड़बड़ा के तुम ने बात
कुछ ग़लत बात लब पर आ गई क्या
Read Full
Amaan mirza
आदतें सारी छोड़ दी मैं ने
तुम तो मुझ को सुधार कर गई हो
Amaan mirza
मीर के ऊला से ग़ालिब का सानी जोड़ दिया
बोला ये शे'र सुनो दाद चाहिए मुझ को

कोई भी दर्द या फिर ज़ख़्म अता करो यारों
शा'इरी के लिए इमदाद चाहिए मुझ को
Read Full
Amaan mirza
नज़दीक में रखा मुझे तन्हा नहीं किया
कइयों ने मुझ को चाहा पर अपना नहीं किया

तुम ने भी भेज दी मेरी जानिब मशकक़तें
सुलझे हुए को उलझा के अच्छा नहीं किया
Read Full
Amaan mirza
मुशायरे का ये भी इक उसूल होना था
कम अज़ कम आज का दिन तो फिज़ूल होना था

जिस इत्मीनान से मैं ने तुम्हें सुना है दोस्त
बस उतना वक़्त मुझे भी वसूल होना था
Read Full
Amaan mirza
बात हम दोनों को ही करनी है लेकिन
दोनों ही ख़ामोश हैं अपनी अना में

दर्द ग़म तकलीफ़ आँसू मिलते हैं बस
और कुछ भी तो नहीं मिलता वफ़ा में
Read Full
Amaan mirza
मुझ सेे मेरी जाँ कर रही हो तर्क-ए-त'अल्लुक़
तुम को कोई और मिल गया या ऊब चुकी हो
Amaan mirza
अपनी जाँ की हिफाज़त भी ख़ुद करते हैं
अब फ़क़ीरों को सदक़ा नहीं देते लोग
Amaan mirza
ये सच है मुझ को दिखते नहीं तेरे ऐब-ओ-ख़म
दिखने लगी हैं ख़ूबियाँ तू है मुझे पसंद
Amaan mirza
हालत को मेरी देख के हँसते तो हो लेकिन
हालात समझने में बहुत देर लगेगी
Amaan mirza
हँस के मिलते हो और दिल में बुग़्ज़ रखते हो
क्या ये सूरत नहीं है दोस्त दोगलेपन की
Amaan mirza

LOAD MORE