Mohit Subran

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@MohitSubran

Mohit Subran shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mohit Subran's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
दुनिया ने दी सदा मुझे दुनिया का हो गया
दुनिया मिरी पुकार पे मेरी नहीं हुई
Mohit Subran
जब जानता था मौत ही है अपनी हम-सफ़र
फिर क्यूँ मैं ज़िन्दगी तिरे धोके में आ गया
Mohit Subran
सहर से शाम तक के शोर से जब ऊब जाती है
ये दुनिया रात की ख़ामोशियों में डूब जाती है
Mohit Subran
है मौत ही तो आख़िरी वो एक हादसा
जिस हादसे के बाद कोई हादसा नहीं
Mohit Subran
सर पे साया न माँ-बाप का हो अगर
ज़िन्दगी हादसे में बदल जाती है
Mohit Subran
तुम्हें तो यार मुयस्सर है बस ख़ुशी ही ख़ुशी
तुम्हारा क्या जिसे चाहो उसे उदास करो
Mohit Subran
जिरह जब-जब हुई इतिहास को ले कर
बदल तब-तब गया भूगोल दुनिया का
Mohit Subran
जो ख़ाली पेट हैं उन की मुराद है रोटी
वो जिन के पेट भरे हैं जहान चाहते हैं
Mohit Subran
आँखों के कोनों से फिसली और पलकों से छूट गई
नींद भी इक धागे जैसी है टूट गई तो टूट गई
Mohit Subran
साँस मेरे सीने से इक-इक उखड़ जाएगी तब भी
देखना दिल में मचलती एक बेचैनी मिलेगी
Mohit Subran
करवट-करवट बढ़ते-बढ़ते
नींद की सीढ़ी चढ़ते-चढ़ते

थक कर आख़िर सो जाता हूँ
मैं बिस्तर से लड़ते-लड़ते
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Mohit Subran
साँस लेती है रौशनी ज्यूँँ ही
तीरगी थरथराने लगती है
Mohit Subran
ये जो अवाम है इस को तू ना-तवाँ न समझ
इसी अवाम ने इक सल्तनत ढहा डाली
Mohit Subran
जिसे मैं जानता हूँ पहले से उस से नहीं जुड़ना
नए रस्ते का तालिब हूँ पुराने पे नहीं मुड़ना
Mohit Subran
यक-ब-यक उट्ठा ज़ेहन से पर्दा
और सब कुछ दिखाई देने लगा
Mohit Subran
जब कि तय है कि सब फिसलना है
फिर भला क्यूँ ये जोड़-जाड़ करूँँ
Mohit Subran
ज़ीस्त हमारी रौशन कर के इस दुनिया से जाने वाले
भूल भले जाएँ हम ख़ुद को लेकिन तुझ को याद रखेंगे
Mohit Subran
ये बात भूलें न नेता कि आम लोगों ने
जभी है चाही जो सरकार वो गिरा डाली
Mohit Subran
लगा लो अपने कलेजे से तुम इन्हें मोहित
ये लोग फिर न तुम्हें दस्तियाब हों शायद
Mohit Subran
कोख से जन्में हम अँधेरों की
सो हमें रौशनी लुभाती है
Mohit Subran

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